रबी फसलों की बुवाई के पीक सीजन के बीच खाद की किल्लत और मांग को लेकर बारां जिले के छबड़ा कस्बे में अफरातफरी का माहौल देखने को मिला है। शनिवार सुबह स्थानीय कृषि विक्रय सहकारी समिति पर डीएपी और यूरिया खाद हासिल करने के लिए किसानों का तांता लग गया। सुबह होते ही समिति परिसर के बाहर लंबी कतारें लग गईं और किसानों को अपनी बारी का घंटों इंतजार करना पड़ा।
अतिरिक्त भीड़ और अफरातफरी की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है। मौके पर पुलिस बल के साथ कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जिनकी सीधी निगरानी में कूपन और तय मात्रा के आधार पर खाद का वितरण किया जा रहा है।
1500 बैग का स्टॉक, हर किसान को तय कोटा
कृषि विभाग के सहायक निदेशक सुरेश मालव के मुताबिक, वर्तमान में सहकारी समिति के पास डीएपी और यूरिया के कुल 1500 बैग का स्टॉक उपलब्ध है। स्टॉक सीमित होने के कारण विभाग ने राशनिंग का फॉर्मूला अपनाया है, ताकि हर जरूरतमंद तक खाद पहुंच सके।
वितरण व्यवस्था के तहत प्रत्येक किसान को एक कट्टा डीएपी और तीन कट्टे यूरिया दिए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह सीमित कोटा इसलिए तय किया गया है ताकि किसी एक व्यक्ति के पास स्टॉक न सिमटे और अधिक से अधिक किसानों को बुवाई के इस नाजुक वक्त पर राहत मिल सके।
बुवाई के समय बढ़ी मांग और प्रशासन की चुनौती
अक्टूबर और नवंबर का यह दौर रबी फसलों की बुवाई के लिए सबसे अहम माना जाता है। खेतों की जुताई के बाद तुरंत डीएपी और यूरिया की जरूरत होती है, जिसके चलते सुबह सूरज निकलने से पहले ही ग्रामीण इलाकों से किसान सहकारी समितियों का रुख करने लगे हैं।
कृषि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध 1500 बैगों का वितरण पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हो और कालाबाजारी या मनमानी की कोई गुंजाइश न बचे। पुलिस और प्रशासनिक अमला इसी उद्देश्य से काउंटर पर डटा हुआ है ताकि शांतिपूर्ण तरीके से कतारबद्ध किसानों को खाद के कट्टे सौंपे जा सकें।
