नागौर जिले के डेगाना निवासी डॉ. कमल किशोर जाजुंदा का ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप के लिए चयन हुआ है। इस फेलोशिप के तहत वे ब्रिटेन के बर्मिंघम स्थित रॉयल ऑर्थोपेडिक अस्पताल में छह सप्ताह तक हड्डी और मांसपेशीय कैंसर के उपचार की उन्नत चिकित्सा पद्धतियों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
इस फेलोशिप के लिए चयनित होने वाले वे राजस्थान के पहले चिकित्सक हैं। डॉ. जाजुंदा वर्तमान में नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के बोन कैंसर विभाग में कंसल्टेंट के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और अनुभव
डॉ. जाजुंदा ने नई दिल्ली स्थित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से बोन रोग के क्षेत्र में स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी की है। इसके बाद उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में वरिष्ठ चिकित्सक के रूप में सेवाएं दीं।
हड्डी एवं मांसपेशीय कैंसर के उपचार में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए उन्होंने मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, नई दिल्ली से विशेष प्रशिक्षण लिया है। इसके अलावा उन्होंने मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में भी चिकित्सकीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
राजस्थान से चिकित्सकीय जुड़ाव
दिल्ली में सेवाएं देने के बावजूद डॉ. जाजुंदा का राजस्थान से चिकित्सकीय जुड़ाव लगातार बना हुआ है। वे जयपुर में महीने में दो बार आउट पेशेंट परामर्श शिविर आयोजित कर रहे हैं। इन शिविरों में हड्डियों के ट्यूमर, सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर तथा अन्य मांसपेशीय एवं हड्डियों से संबंधित कैंसर रोगों की जांच कर आगे के उपचार की योजना तैयार की जाती है।
बर्मिंघम में होने वाला यह प्रशिक्षण केवल नई सर्जिकल तकनीकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके दौरान जटिल सारकोमा रोगियों की जांच, रोग की पहचान, विशेषज्ञों की संयुक्त सलाह, कैंसर सर्जरी और उसके बाद पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को समग्र उपचार के रूप में समझने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञता और आगामी उद्देश्य
डॉ. जाजुंदा की प्रमुख विशेषज्ञताओं में हड्डियों का कैंसर, सॉफ्ट टिश्यू कैंसर, शरीर के अन्य हिस्सों से हड्डियों में फैला कैंसर तथा जटिल अंग पुनर्निर्माण शामिल हैं। उनका उद्देश्य ब्रिटेन में प्राप्त उन्नत चिकित्सकीय अनुभव का उपयोग भारत में कैंसर मरीजों के उपचार को बेहतर बनाने तथा अंग बचाने और जटिल पुनर्निर्माण से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को आगे विकसित करने में करना है।
