अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर फीफा वर्ल्ड कप के दौरान खेल प्रशासन में हस्तक्षेप करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ मुकाबले में रेड कार्ड मिलने के बाद अगले मैच से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन ट्रम्प ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोन किया और बात कर इस फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया। इसके बाद फीफा ने बालोगुन का एक मैच का प्रतिबंध हटा दिया और उन्हें बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेलने की अनुमति दे दी। वही बालोगुन के मैदान में उतरने के बावजूद अमेरिका को बेल्जियम के हाथों 4-1 से करारी हार का सामना करना पड़ा और टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने फीफा से इस मामले में दखल देने की बात कही थी। दूसरी ओर, फीफा ने सफाई देते हुए ये साफ कहा कि अनुशासन समिति ने उपलब्ध तथ्यों और नियमों के आधार पर स्वतंत्र रूप से फैसला लिया है। इस निर्णय का बेल्जियम फुटबॉल महासंघ और यूरोपीय फुटबॉल संगठनों ने कड़ा विरोध किया है और खेल में राजनीतिक हस्तक्षेप तथा फीफा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। यह वर्ल्ड कप इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने का दूसरा मामला माना जा रहा है। इससे पहले 1962 विश्व कप में ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी गरिंचा का रेड कार्ड भी रद्द किया गया था। वहीं, टूर्नामेंट के अन्य मुकाबले में स्पेन ने पुर्तगाल को 1-0 से हराकर उसे भी विश्व कप से बाहर का रास्ता दिखाया
ट्रम्प के एक फोन से बदला फीफा का फैसला
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