दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बुधवार को विपक्षी गठबंधन 'INDIA' की आठवीं बैठक संपन्न हुई। करीब तीन घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), EVM-VVPAT की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर प्रमुखता से चर्चा की गई। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए।
इस बैठक में कुल 19 दल शामिल हुए, जिनके पास लोकसभा में 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं। हालांकि, इस अहम मंथन से आम आदमी पार्टी (AAP), तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने दूरी बनाई और उनके प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं रहे।
कांग्रेस और राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता पर सवाल खड़े किए।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- "मोदी-शाह ने चुनाव आयोग को अपनी कठपुतली बना लिया है। इसके जरिए संस्थागत तरीके से वोट चोरी की जा रही है, जिसे देश का विपक्ष किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगा।"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी बैठक के बाद आक्रामक तेवर दिखाए और सत्ता पक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को हाईजैक करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने कहा- "बीजेपी, पीएम मोदी, अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मिलकर देश के लोकतंत्र पर सुनियोजित कब्जा कर रहे हैं। हम इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम यह पक्का करेंगे कि भारतीय लोकतंत्र को बर्बाद करने वालों को इसकी सजा मिले, क्योंकि हमारा लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति से बड़ा नहीं है।"
राष्ट्रव्यापी आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों का ऐलान
वोट चोरी और चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों के खिलाफ विपक्ष ने सड़क पर उतरकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। खड़गे ने बताया कि इस अभियान में आम नागरिकों, युवाओं, एनजीओ और लोकतांत्रिक संगठनों को बड़े पैमाने पर जोड़ा जाएगा।
विरोध प्रदर्शनों का पूरा शेड्यूल इस प्रकार तय किया गया है:
- 2 से 8 अक्टूबर: देश के सभी जिलों में 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' निकाला जाएगा और जिला कलेक्ट्रेट (DM ऑफिस) के बाहर जोरदार प्रदर्शन किए जाएंगे।
- 6 अक्टूबर: सभी विपक्षी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय तक 'सेव डेमोक्रेसी' मार्च निकालेंगे। विपक्ष पहले इसी दिन मार्च निकालना चाहता था, लेकिन सभी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इसे 6 अक्टूबर तय किया गया है।
- अक्टूबर का दूसरा हफ्ता: विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल देश के राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा और समय मांगेगा।
- इसके अलावा, देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़ी रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा।
विपक्षी दलों की मुख्य मांग है कि आगामी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से कराए जाएं, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा फिर से कायम हो सके। बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख दलों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC), NCP (SP), शिवसेना (UBT), RJD, CPM, CPI, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल रहे।
