खरगोन के भावसार मोहल्ले में सोमवार तड़के 4 बजे मां अंबे की सवारी निकाली गई। शारदीय नवरात्रि के महाअष्टमी पर्व पर आयोजित इस खप्पर उत्सव में ढोल-मंजीरों की गूंज और पारंपरिक गरबियों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। भावसार क्षत्रिय समाज की इस 408 साल पुरानी परंपरा के तहत सुबह तक चले धार्मिक आयोजन में माता के दर्शन के लिए परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा।
भावसार मांगलिक भवन प्रांगण में हुए इस आयोजन में परंपरा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। महाअष्टमी पर मां भवानी के स्वरूप में मनोज मधुसूदन भावसार और आयुष सुनील भावसार ने पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुति दी। वहीं, भगवान गणेश के स्वरूप में चंदन और प्रीत भावसार शामिल हुए। विशिष्ट गायन शैलियों और देवी के जयकारों के बीच हुए इस अनुष्ठान से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
पीढ़ियों से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत
भावसार क्षत्रिय समाज में यह खप्पर उत्सव सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाया जा रहा है। नवरात्रि के दौरान होने वाले इन आयोजनों में पारंपरिक अनुष्ठान और देवी स्वरूपों की प्रस्तुतियां समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखती हैं। नई पीढ़ी के युवा भी इस परंपरा में पूरी आस्था के साथ हिस्सा ले रहे हैं।
महानवमी पर निकलेगी मां काली की सवारी
दो दिवसीय इस उत्सव के अगले चरण में महानवमी पर मां काली की सवारी निकाली जाएगी। खप्पर समिति अध्यक्ष डॉ. मोहन भावसार ने बताया कि मां काली के स्वरूप में अमित जगदीश भावसार प्रस्तुति देंगे। इस पारंपरिक सवारी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।
समारोह के अंतिम दिन भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के प्रसंग पर आधारित स्वांग भी रचा जाएगा। इस पारंपरिक मंचन में अभिषेक भावसार 'लाल' भगवान नरसिंह की भूमिका निभाएंगे, जबकि हिरण्यकश्यप के रूप में उदित संतोष भावसार नजर आएंगे। नरसिंह-हिरण्यकश्यप वध का यह प्रसंग बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देगा।
आयोजन में ये रहे मौजूद
इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के दौरान भावसार क्षत्रिय समाज खरगोन के अध्यक्ष सुनील भावसार, जगदीश भावसार, राम भावसार और ऐश्वर्य कान्हा भावसार उपस्थित रहे। इसके अलावा, संचालक मंडल से डॉ. गौरव भावसार, शैलू भावसार, रवि भावसार और डॉ. प्रीत भावसार सहित समाज के तमाम गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
