करवा चौथ का व्रत अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पूरा दिन निर्जला उपवास रखती हैं। हालांकि, व्रत के दिन ही मासिक धर्म (पीरियड्स) शुरू हो जाने पर कई महिलाओं के मन में संशय पैदा हो जाता है कि इस स्थिति में उपवास जारी रखा जाए या नहीं, सरगी खाई जा सकती है या नहीं और चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दिया जाए।
धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के जानकारों के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान भी करवा चौथ का व्रत रखना पूरी तरह संभव है। यह एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है, इसलिए व्रत रखना या न रखना पूरी तरह महिला की निजी आस्था, शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। यदि उपवास के दौरान कमजोरी या स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या महसूस हो, तो शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालने से बचना चाहिए।
पूजा-पाठ और सरगी के नियम
मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दिनों में महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनने के साथ पूजा-पाठ में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, कुछ परिवारों की परंपराओं में इस दौरान पूजा की थाली, करवा और देवी-देवताओं की मूर्तियों को सीधे स्पर्श करने से बचने की सलाह दी जाती है।
ऐसी स्थिति में महिलाएं घर के किसी अन्य सदस्य की सहायता से अनुष्ठान संपन्न करा सकती हैं। सरगी खाने को लेकर भी कोई रोकटोक नहीं है, क्योंकि यह व्रत की शुरुआत से पहले का खानपान है। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पारिवारिक मान्यताओं के आधार पर इन नियमों के पालन के तरीके भिन्न हो सकते हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने का तरीका
व्रत के अंत में चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने की परंपरा मुख्य होती है। जिन घरों में मासिक धर्म के दौरान पूजा सामग्री या करवे को छूने की मनाही होती है, वहां पति या परिवार का कोई दूसरा सदस्य अर्घ्य देने की क्रिया में मदद कर सकता है। महिला चांद के दर्शन कर दूर से हाथ जोड़कर अपनी प्रार्थना पूरी कर सकती है। अर्घ्य देने की यह विधि पूरी तरह पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं पर आधारित होती है।
