राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (मा) योजना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ा संबल बन रही है। महंगे इलाज की विवशता और अपनों की जान बचाने की जद्दोजहद के बीच यह योजना हजारों घरों के लिए उम्मीद की किरण साबित हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान सरकार के 34 महीनों के कार्यकाल में इस योजना के जरिए करीब 2,000 ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के विजन के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस योजना का दायरा लगातार बढ़ाया है। इसके तहत उपचार के पैकेजों की संख्या 1,800 से बढ़ाकर करीब 2,200 कर दी गई है, जिससे सामान्य बीमारियों से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक की सुविधाएं इसमें शामिल हो गई हैं। पिछले 34 महीनों में लगभग 50 लाख लोगों को इस योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क उपचार मिल चुका है, जिस पर राज्य सरकार 10,678 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट में उल्लेखनीय वृद्धि
किडनी और बोन मैरो जैसी जटिल बीमारियों के इलाज में ‘मा’ योजना के जरिए बड़े स्तर पर राहत पहुंचाई गई है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 1,310 मरीजों को कैशलेस किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल चुकी है, जिस पर 58 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। तुलनात्मक रूप से पूर्ववर्ती सरकार के पूरे कार्यकाल में यह आंकड़ा 748 ट्रांसप्लांट का था।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के मामलों में भी बड़ा उछाल आया है। पिछली सरकार के समय इस योजना के तहत केवल 88 लाभार्थियों को यह सुविधा मिल पाई थी, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में यह संख्या बढ़कर 563 तक पहुंच गई है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया पर खर्च होने वाली राशि भी 5.74 करोड़ रुपये से बढ़कर 35 करोड़ रुपये हो गई है। लीवर ट्रांसप्लांट के मामले में भी वर्तमान सरकार के दौरान 112 मरीजों को सहायता मिली, जबकि पिछली सरकार में यह संख्या 60 थी। इसके साथ ही 9 मरीजों में हृदय प्रत्यारोपण और 671 लाभार्थियों के कॉक्लियर इम्प्लांट किए जा चुके हैं।
इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी से दूसरे राज्यों में भी इलाज संभव
योजना के दायरे को विस्तार देते हुए सरकार ने इसमें इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी की सुविधा शुरू की है। इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश के नागरिकों को अब देश के अन्य राज्यों में भी अंग प्रत्यारोपण की सुविधा मिल पा रही है।
चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरे राज्यों में अंग प्रत्यारोपण के 106 मामलों में करीब 6 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है। इनमें 79 किडनी ट्रांसप्लांट, 12 लिवर ट्रांसप्लांट, 8 बोन मैरो ट्रांसप्लांट, 4 लंग ट्रांसप्लांट और 3 हार्ट ट्रांसप्लांट के मामले शामिल हैं।
"राज्य सरकार का यह प्रयास है कि आर्थिक विवशता किसी भी जरूरतमंद मरीज के उपचार में बाधा न बने। जब किसी परिवार के सामने अपनों की जिंदगी बचाने का संकट हो, तब सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना उम्मीद का माध्यम बननी चाहिए।" — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
