संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक-2026 पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक पेश किया, जिस पर करीब सात घंटे तक चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता बहस में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पहले बुधवार को लोकसभा ने लगभग सात घंटे की चर्चा के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया था।
संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों पर सख्त प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत पेपर लीक की जांच अधिकतम दो महीने में पूरी करने का प्रावधान रखा गया है। दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा और संगठित अपराध के मामलों में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
उधर, संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक हाईलेवल बैठक भी हुई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा मौजूद रहे। हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई।
इससे पहले राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही NEET पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष ने हंगामा किया और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं लोकसभा में भी हंगामे के कारण कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा और पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाएगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल सजा कड़ी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी आवश्यकता है।
