पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को सौंप दिया है।
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए उन्होंने अपने फैसले की सार्वजनिक घोषणा की। विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका इस्तीफा 1 नवंबर, 2026 से प्रभावी माना जाएगा। कुंवर विजय प्रताप को पिछले साल जून में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पांच साल के लिए निलंबित किया गया था।
दो और विधायकों के इस्तीफे के बाद बड़ा कदम
कुंवर विजय प्रताप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सियासी गलियारों में पहले से ही उथल-पुथल मची हुई है। इससे ठीक एक दिन पहले, रविवार को 'आप' के दो अन्य विधायकों चेतन सिंह जौड़ामाजरा (समाना सीट) और हरमीत सिंह पठानमाजरा (सनौर सीट) ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। एक के बाद एक तीन विधायकों के पार्टी से किनारा करने से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पुलिस सेवा से वीआरएस लेकर 2021 में राजनीति में उतरे कुंवर विजय प्रताप के इस कदम से आगामी सियासी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में अमृतसर नॉर्थ सीट से जीत दर्ज की थी।
सरकार से तल्खियां और पुराने मुद्दे
भगवंत मान सरकार के साथ कुंवर विजय प्रताप के मतभेद लंबे समय से जगजाहिर रहे हैं। वह कई मौकों पर सरकार के कामकाज की खुलकर आलोचना कर चुके हैं। 2015 के बहुचर्चित बेअदबी और कोटकपूरा-बहिबल कलां पुलिस फायरिंग मामलों में न्याय मिलने में हो रही देरी को लेकर उन्होंने कई बार विधानसभा के भीतर और बाहर अपनी ही सरकार को घेरा था।
खास बात यह है कि कुंवर विजय प्रताप खुद इन मामलों की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (SIT) का हिस्सा रह चुके हैं। इसके अलावा, अमृतसर में जहरीली शराब कांड के दौरान 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए थे। पार्टी लाइन से हटकर शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी और विजिलेंस कार्रवाई पर सवाल उठाने के बाद उन्हें पिछले साल निलंबित कर दिया गया था।
