पश्चिमी और मध्य राजस्थान के विस्तृत क्षेत्रों में गहराए गंभीर सूखे और अकाल से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रदेश के 16 जिलों के करीब 16,400 गांवों और 52 शहरों में पेयजल, चारा और रोजगार के भारी संकट को देखते हुए चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विशेष राहत योजना तैयार कर रहे हैं। अगले 15 दिनों में इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा, जिसके बाद सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज का ऐलान होने की संभावना है।
सूखे की चपेट में 16 जिले और न्यूनतम बारिश का संकट
सूखे की सबसे भारी मार पश्चिमी राजस्थान के नौ और मध्य राजस्थान के सात जिलों समेत कुल 16 जिलों पर पड़ी है। इन इलाकों के अधिकांश हिस्सों में इस सीजन में सामान्य से 33 प्रतिशत बारिश भी दर्ज नहीं की गई है, जिससे हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बाड़मेर के 2,460 और जोधपुर के 1,838 गांव शामिल हैं। इसके अलावा नागौर के 1,589, जयपुर के 1,400, बालोतरा के 1,216, अजमेर के 1,134, जालोर के 1,117, फलोदी के 1,064, पाली के 1,030, जैसलमेर के 961, चूरू के 934, बीकानेर के 919, ब्यावर के 787 और सिरोही के 530 गांव सीधे तौर पर अकाल की चपेट में हैं।
राहत कार्यों की रूपरेखा और प्रशासनिक तैयारी
जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाने के लिए आपदा प्रबंधन, जलदाय, जल संसाधन तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभागों के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। संकट से तुरंत निपटने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 650 वाहन और 3,200 श्रमिकों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही, लंबे समय से बंद पड़े हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत कराने के लिए 150 विशेष वाहनों की स्वीकृति दी गई है।
स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय और कार्यवाही के लिए जिला कलेक्टरों के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए गए हैं। कलेक्टर आपातकालीन मद से 75 लाख रुपये तक की राशि खर्च कर सकते हैं, जबकि जल व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए वे अपने स्तर पर 25 लाख रुपये तक की राशि स्वीकृत करने के लिए अधिकृत किए गए हैं।
जल प्रबंधन रणनीति और मॉनिटरिंग
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि उपलब्ध जल संसाधनों और अतिरिक्त आवश्यकताओं का सटीक आकलन करते हुए राज्य स्तरीय एक्शन प्लान को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों के लिए एक अलग और विशेष रणनीति बनाई गई है। मैदानी इलाकों में पानी की बर्बादी रोकने और सुचारू वितरण के लिए नियमित मॉनिटरिंग को बेहद सख्त कर दिया गया है, ताकि आम नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता बनी रहे।
