राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव समय पर होने पर संशय के बादल छा गए हैं। हाईकोर्ट ने 22 मई को आदेश दिया था कि 31 जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाए, लेकिन अब तक आरक्षण निर्धारण का काम ही पूरा नहीं हो सका है। राज्य निर्वाचन आयोग और सरकारी विभागों के बीच चल रहे लगातार पत्राचार के बावजूद चुनाव कार्यक्रम अभी तक घोषित नहीं हो पाया है।
आरक्षण का 'ट्रिपल टेस्ट' बना अड़चन
राज्य निर्वाचन आयोग ने 1 जून से लेकर अब तक पंचायतीराज और स्वायत्त शासन विभाग को छह बार रिमाइंडर भेजे हैं। आयोग का स्पष्ट कहना है कि राजस्थान पंचायतीराज निर्वाचन नियम, 1994 और नगरीय स्वशासन निर्वाचन नियम, 1994 के तहत SC, ST, OBC और महिला वर्ग का आरक्षण तय होना अनिवार्य है। इसके बिना चुनाव की घोषणा संभव नहीं है।
वहीं, 16 जून को ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप 'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सरकार ने बताया कि राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का गठन तो कर दिया गया है, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
जिम्मेदारी पर आयोग और सरकार आमने-सामने
23 जून को राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर यह याद दिलाया कि ट्रिपल टेस्ट के लिए गठित आयोग राज्य सरकार का है। आयोग ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट समय पर प्राप्त करना और नियमों के अनुसार आरक्षण तय करके जानकारी देना सरकार का दायित्व है।
नगरीय निकाय चुनावों की स्थिति भी कमोबेश यही है। स्वायत्त शासन विभाग ने ओबीसी आयोग से रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह किया है, ताकि निर्वाचन आयोग को सूचना भेजी जा सके। 29 जून को RTI के तहत सामने आए दस्तावेजों से यह साफ हो गया है कि हाईकोर्ट की डेडलाइन के करीब होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर काम अभी भी शुरुआती दौर में है।

