अयोध्या और काशी की तर्ज पर मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन को देश का नया 'स्पिरिचुअल इकोनॉमी' हब बनाने की तैयारी तेज हो गई है। साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 18,000 करोड़ रुपये की 129 विकास योजनाओं पर काम कर रही हैं। इस मेगा प्लान का मकसद केवल 30 दिनों के धार्मिक समागम के दौरान आने वाले करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं को सुविधाएं देना नहीं है, बल्कि मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को दशकों के लिए एक मजबूत आधार देना है।
स्थायी बुनियादी ढांचे पर जोर
अब तक सिंहस्थ मेलों के दौरान तंबू और अस्थायी निर्माणों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते थे, जो मेला खत्म होने के बाद बेकार हो जाते थे। इस बार सरकार ने इस रणनीति में बदलाव करते हुए पूरी तरह स्थायी संपत्तियों और परमानेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर फोकस किया है। नए ओवरब्रिज, फोरलेन सड़कें, अस्पताल और उन्नत सीवरेज नेटवर्क तैयार किए जा रहे हैं, जो सिंहस्थ के बाद भी स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के लिए काम आएंगे।
इन 129 विकास परियोजनाओं में कई बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिनसे शहर की तस्वीर बदल रही है। शहर में 853 करोड़ रुपये की लागत से 22 नए पुल बनाए जा रहे हैं, जबकि 778 करोड़ रुपये खर्च करके 29 किलोमीटर लंबे नए घाटों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा 750 करोड़ रुपये से सड़क चौड़ीकरण नेटवर्क, 645 करोड़ रुपये से इंटीग्रेटेड टेंपल इकोसिस्टम और 592 करोड़ रुपये की लागत से गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज तैयार किया जा रहा है।
औद्योगिक निवेश और 29 हजार रोजगार
उज्जैन में सिर्फ धार्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि औद्योगिक मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव आ रहा है। 9,380 करोड़ रुपये के निवेश से विक्रम उद्योगपुरी और मेडिकल डिवाइस पार्क को प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 87 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को जमीन आवंटित की जा चुकी है और कई इकाइयों में उत्पादन भी शुरू हो गया है।
प्रशासन के मुताबिक, इस औद्योगिक सेटअप से क्षेत्र में 29 हजार से अधिक रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिसमें स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही महिला कर्मचारियों के लिए 50 करोड़ रुपये की लागत से 1,554 बेड क्षमता वाला एक हाई-टेक हॉस्टल भी तैयार किया जा रहा है।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार में बूम
महाकाल महालोक के निर्माण के बाद से ही उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में सावन माह के सिर्फ 9 दिनों के भीतर 32.64 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इस भारी भीड़ से होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, ई-रिक्शा, हस्तशिल्प, ट्रैवल और प्रसाद कारोबार से जुड़े लोगों की आय में जबरदस्त इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को और गति मिल रही है।
