दीपावली के पर्व पर रोशनी और उत्साह के बीच किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा विभाग ने कमर कस ली है। राजधानी के एसएमएस अस्पताल समेत प्रदेशभर के सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। बर्न आईसीयू और एचडीयू वार्डों में अतिरिक्त बेड आरक्षित किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।
चौबीस घंटे उपलब्ध रहेंगे विशेषज्ञ
त्योहारी सीजन के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्लास्टिक सर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ और ट्रॉमा एक्सपर्ट अस्पताल में चौबीस घंटे उपलब्ध रहेंगे। ट्रॉमा, कैजुअल्टी और बर्न यूनिट से जुड़े किसी भी डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ को विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अवकाश नहीं दिया जाएगा।
अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाइयों, टेटनस इंजेक्शन, एंटीबायोटिक्स, बैंडेज और सर्जिकल सामग्री का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट और बैकअप सिलेंडरों की कार्यक्षमता की भी विशेष जांच की गई है। पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी जैसी जांच सेवाएं भी दिन-रात चालू रहेंगी।
ब्लड बैंक और इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर तैयार
ब्लड बैंकों में सभी प्रमुख ब्लड ग्रुप के साथ पीआरबीसी और प्लेटलेट्स का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत खून उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा इमरजेंसी और बर्न ऑपरेशन थिएटरों को भी पूरी तरह तैयार हालत में रखा गया है।
हर अस्पताल में एक वरिष्ठ चिकित्सक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिसकी देखरेख में 24 घंटे संचालित होने वाला इमरजेंसी कंट्रोल रूम काम करेगा। यह कंट्रोल रूम पुलिस, जिला प्रशासन और फायर ब्रिगेड के साथ तालमेल बनाए रखेगा। चिकित्सा अधीक्षकों और पीएमओ को अस्पतालों की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डॉक्टरों की सलाह: जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
पटाखे चलाते समय बरती गई थोड़ी सी भी असावधानी गंभीर साबित हो सकती है। एसएमएस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आर.के. जैन ने अपील की है कि बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें।
"पटाखे हमेशा खुले स्थान पर, घरों और खड़े वाहनों से सुरक्षित दूरी पर ही जलाएं। अनार या फव्वारे जैसे पटाखों को हाथ में पकड़कर न चलाएं। आतिशबाजी के दौरान नायलॉन या पॉलिएस्टर के कपड़े पहनने से बचें और सूती वस्त्रों को प्राथमिकता दें।"
जलने पर क्या करें और क्या नहीं?
पटाखे से झुलसने की स्थिति में प्राथमिक उपचार को लेकर डॉक्टरों ने कुछ जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं:
- प्रभावित हिस्से को कम से कम 20 मिनट तक बहते हुए सामान्य ठंडे पानी के नीचे रखें।
- जले हुए हिस्से पर बर्फ, टूथपेस्ट, घी या तेल बिल्कुल न लगाएं।
- घाव को किसी साफ सूती कपड़े से ढकें और फफोलों को भूलकर भी न फोड़ें।
- यदि चेहरा, आंख या हाथ गंभीर रूप से झुलस गए हैं, तो घरेलू नुस्खों के चक्कर में पड़ने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
