अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सियासी राह में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स ने खासी बढ़त हासिल कर ली है, जिससे संसद में सत्ता के समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं। जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स की ऐतिहासिक जीत ने इस मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है। फिलहाल सीनेट के अंतिम नतीजों का इंतजार किया जा रहा है, जो तय करेंगे कि आगामी दो सालों में अमेरिकी संसद का पावर बैलेंस किसके हाथ में रहेगा।
प्रतिनिधि सभा और सीनेट में कड़ा मुकाबला
मतगणना के शुरुआती रुझानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने कई अहम सीटों पर बढ़त बना ली है और वे प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण पा सकते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी कैरोलिना में डेमोक्रेट रॉय कूपर ने रिपब्लिकन माइकल Whatly को हराकर सीनेट की सीट अपने नाम की है। वहीं, जॉर्जिया में जॉन ओसॉफ ने अपनी सीट सुरक्षित रखी और न्यू हैम्पशायर में क्रिस पप्पास ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को पीछे छोड़ दिया।
सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट्स को अभी और सीटों की दरकार है। पार्टी अब तक 11 सीटें जीत चुकी है, जबकि अन्य सीटों पर कांटे की टक्कर जारी है। डेलावेयर में क्रिस कून्स, न्यू जर्सी में कोरी बुकर, रोड आइलैंड में जॉन रीड, मैसाचुसेट्स में एडवर्ड मार्की और वर्जीनिया में मार्क वार्नर ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा कोलोराडो से जॉन हिकेनलूपर और न्यू मैक्सिको से बेन लुजान ने भी अपनी सीटें बचाई हैं।
दूसरी तरफ, रिपब्लिकन पार्टी भी मुकाबले में डटी हुई है। वेस्ट वर्जीनिया में कैरल मिलर और ओक्लाहोमा में टॉम कोल ने प्रतिनिधि सभा की सीटें जीतकर पार्टी की स्थिति संभाली है।
जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स की ऐतिहासिक जीत
जॉर्जिया के गवर्नर पद के चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार कीशा लांस बॉटम्स ने रिपब्लिकन कारोबारी रिक जैक्सन को शिकस्त देकर नया इतिहास रच दिया है। वे अमेरिका की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बन गई हैं। अटलांटा की पूर्व मेयर रह चुकीं बॉटम्स का मुकाबला एक बेहद मजबूत और वित्तीय रूप से संपन्न उम्मीदवार से था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिक जैक्सन ने अपने चुनावी अभियान में 200 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए थे, लेकिन इसके बावजूद मतदाताओं ने बॉटम्स पर भरोसा जताया। जानकारों का मानना है कि अटलांटा के आसपास बढ़ती आबादी और बदलते मतदाताओं के रुझान ने इस नतीजे में अहम भूमिका निभाई। बॉटम्स ने अपने प्रचार के दौरान आर्थिक असमानता, क्षेत्रीय विकास और सामाजिक मुद्दों पर मुख्य रूप से फोकस किया था।
ट्रंप प्रशासन पर क्या होगा असर
देशभर के मतदाताओं के लिए इस बार महंगाई, ईंधन की कीमतें, टैक्स और आर्थिक सुरक्षा सबसे बड़े चुनावी मुद्दे रहे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कामकाज के तरीके और देश की आर्थिक दिशा को लेकर मतदाताओं की नाराजगी भी इन नतीजों में साफ झलक रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन परिणामों का सीधा असर ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल के बचे हुए दो सालों पर पड़ेगा। यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा पर पूरी तरह कब्जा कर लेते हैं, तो सरकार की नीतियों की संसदीय जांच और निगरानी काफी बढ़ जाएगी। फिलहाल सीनेट के अंतिम आंकड़ों और शेष राज्यों के चुनावी नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
