Indore : इंदौर के पावन आध्यात्मिक उपासना केंद्र श्री क्षेत्र गोंदवले धाम में 31 मई रविवार को संत श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज की मूर्ति स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भव्य नाम संकीर्तन महोत्सव और सत्संग उपासना का आयोजन किया गया। लगभग हजारों की संख्या में श्रद्धालु मूर्ति स्थापना के उपलक्ष्य में हुए इस सत्संग में शामिल हुए। सत्संग में सभी श्रद्धालु नामजाप संकीर्तन के साथ ईश्वर के भजनों में डूबे नजर आये। इस साल गोंदवले धाम में मूर्ति स्थापना दिवस का यह 28 वर्ष पूर्ण हुआ है। इस पावन अवसर पर हजारों भक्त गोंदवले धाम के सदगुरू पूज्य श्रीश्रीराम कोकजे गुरुजी से आशीर्वाद लेने पहुंचे। साथ ही भक्तों ने धाम के गर्भ गृह में विराजमान संत श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज के दर्शन लाभ लिए।

गौरतलब है कि इंदौर में श्री क्षेत्र गोंदवले धाम की स्थापना पूज्य गुरुदेव श्रीराम कोकजे गुरुजी ने महाराष्ट्र के सतारा में गोंदवले गांव में स्थित श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज की समाधि मंदिर की प्रेरणा से इंदौर में गोंदवले धाम की स्थापना करीब 28 वर्ष पहले की। श्री सद्गुरु ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज के जीवन से प्रेरित होकर श्री कोकजे गुरुजी ने इंदौर में राम नाम की अलख जगाई। इसका परिणाम यह है कि आज गोंदवले धाम में रविवार को होने वाली नियमित सत्संग उपासना में हजारों की संख्या में भक्त दूर दूर से आकर सत्संग उपासना के सहभागी बन रहे है। साथ ही रविवार को मूर्ति स्थापना दिवस के अवसर पर धाम में 13 घंटे तक अखंड नामजाप कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। इस दौरान भक्तों ने अपनी इच्छा अनुसार माला जाप की। इसके साथ ही धाम में  सुबह 10:30 बजे श्री विष्णु पूजा एवं श्री सत्यनारायण पूजन का आयोजन किया गया। सत्संग उपासना के पश्चात महाप्रसादी वितरण की गई एवं पूज्य सदगुरू श्री राम कोकजे गुरुजी का तुलादान किया गया। इस दौरान पूरे गोंदवले धाम के परिसर में श्री राम जय राम जय जय राम का जयकारा गूंजता रहा।

गोंदलवे धाम से जुड़े है बच्चों से लेकर युवा वर्ग....

धाम के अनुयायियों का मानना है कि श्री क्षेत्र गोंदवले धाम में पूज्य गुरुदेव श्रीराम कोकजे गुरुजी के सानिध्य में आकर मन शांति और जीवन में समाधान बना हुआ है। इस धाम में केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि नन्हे बच्चों से लेकर युवा वर्ग भी अधिक संख्या में जुड़ा है। गोंदवले धाम के अनुयायी बताते है कि पूज्य श्री राम कोकजे गुरुजी के सानिध्य में आकर असंख्य लोगों का कल्याण हुआ है। जिस युग में युवा नशे की ओर स्वयं को धकेल रहा है, लेकिन उसके विपरीत गोंदवले धाम में बच्चों से लेकर युवा नियमित नाम जाप करते और प्रति रविवार को सत्संग उपासना में शामिल होते है।

नाम जाप से मिलता है सहन करने का सामर्थ्य...

पूज्य श्री राम कोकजे गुरुजी भक्तों को नियमित 2 माला करने का उपदेश देते है। एक माला सुबह और एक माला रात को सोने से पहले करें, इस उपदेश का तात्पर्य यह है कि मनुष्य भक्ति भले थोड़ी करे, लेकिन नियमित करें। नाम जाप के प्रति हमारा प्रेम निर्माण हो। मनुष्य जिस भी अवस्था में हो, नाम जाप में रुचि रखे और जिस भी ईश्वर स्वरूप को मनुष्य मानता है, उनका नाम स्मरण करता रहे। फिर चाहे जैसी भी परिस्थिति हो परमात्मा और सदगुरू अपने भक्तों को हर हाल में सहन करने का सामर्थ्य देते है।

पूज्य श्री राम कोकजे गुरुजी कहते है कि भक्ति का उद्देश्य होता है कि जीवन में चाहे जैसी भी परिस्थिति हो, उनमें मनुष्य को सहन करने का सामर्थ्य मिले। मन विचलित ना हो, ईश्वर की कृपा से जो भी मिला, उसे मानव पर्याप्त समझें और प्रभु को धन्यवाद अर्पित करें यही भक्ति का एक मात्र ध्येय होना चाहिए।

श्री ब्रह्मचैतन्य महाराज ने अपने जीवनकाल में राम नाम की अलख जगाई...

आपको बता दें कि गोंदवले धाम में विराजमान संत श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज को हनुमानजी का अवतार माना जाता है। संत श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज ने अपने जीवनकाल में राम नाम की अलख जगाई। श्री ब्रह्मचैतन्य महाराज का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के गोंदवले गांव में 19 फरवरी सन् 1845 को हुआ था और 22 दिसम्बर 1913 को उन्होंने देह त्यागी थी।

संत श्री ब्रह्मचैतन्य महाराजजी के शिष्य पूज्य श्रीराम कोकजे गुरुजी कहते है कि जो भी मनुष्य श्री ब्रह्मचैतन्य महाराज को नमस्कार करने के लिए आते थे, श्री महाराज उसके पीठपर हाथ फेरकर  कहते थे'– बालक, भगवान ने जिस परिस्थिति में हमें रखा है, उसी परिस्थिति में समाधान मानो और उसके नाम को कभी मत भूलो। जो नाम लेगा, उसके पीछे राम आधार के रूप में खड़ा है। नाम लेनेवाले का राम कल्याण करता है। यह मेरा कहना अंत तक मत भूलों।'


पूज्य श्री राम कोकजे गुरुजी ने बताया कि भगवान के नाम की श्रेष्ठता और गौरव करते करते उनके आराध्य सदगुरू श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज जी की आयु का प्रत्येक क्षण व्यतीत हुआ। नाम की महिमा और गरिमा के लिए उन्होंने जन्म लिया था। आजन्म उन्होंने राम नाम का गायन किया और अपनी आयु के अंतिम क्षण भी प्रभु श्री राम के नाम की महिमा कथन करने में व्यतीत किए। श्रीमहाराज ने आजन्म काया-वाचा-मन से संसार में नाम के सिवाय दूसरा कोई सत्य माना ही नहीं।