लोकेशन मंदसौर
रिपोर्ट-राहुल पोरवाल
मंदसौर जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी RTE योजना के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं मिलने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रथम चरण की लॉटरी में चयन होने के बावजूद करीब 14 बच्चों को निजी स्कूल में प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।जानकारी के अनुसार सत्र 2026-27 के लिए अभिभावकों ने अपने बच्चों के आरटीई योजना अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन किए थे, जिसमें सेंट थॉमस स्कूल मंदसौर का चयन भी किया गया था। बच्चों के मोबाइल पर संदेश प्राप्त हुआ कि उनके बच्चों का चयन हो चुका है और निर्धारित तिथि तक स्कूल में प्रवेश लेना सुनिश्चित करें। लेकिन जब अभिभावक बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि स्कूल में सीटें भर चुकी हैं।इसके बाद अभिभावकों को दोबारा मोबाइल संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें बच्चों का प्रवेश निरस्त होने की जानकारी दी गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद गरीब और मजदूर वर्ग के परिवार परेशान हो गए। पिछले एक माह से अधिक समय से अभिभावक लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पाया है।मामले को लेकर अभिभावकों ने कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिए, जनसुनवाई में शिकायत दर्ज करवाई, 181 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत की। इसके अलावा सांसद, मंत्री और विधायक से भी मुलाकात की गई, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया।मंगलवार को भीषण गर्मी के बीच छोटे-छोटे मासूम बच्चे अपने अभिभावकों के साथ जनसुनवाई में पहुंचे। बच्चों के हाथों में दस्तावेज और आंखों में स्कूल जाने की उम्मीद दिखाई दे रही थी। इसी दौरान जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर भी बच्चों के समर्थन में आगे आए और कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।दीपक सिंह गुर्जर ने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि शासन की योजना के तहत चयन होने के बाद भी बच्चों को प्रवेश नहीं मिलता है तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल बच्चों को प्रवेश दिलाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।अभिभावकों का कहना है कि आरटीई योजना गरीब बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बनाई गई है, लेकिन यदि चयन के बाद भी प्रवेश नहीं मिलेगा तो गरीब परिवारों का शिक्षा व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। कई परिवारों ने चिंता जताई कि यदि बच्चों का प्रवेश निरस्त हो गया तो भविष्य में उन्हें इस योजना का लाभ दोबारा नहीं मिल सकेगा, जिससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।अब बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर चयनित बच्चों को शिक्षा का अधिकार कब मिलेगा और जिम्मेदार विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा।
