आगर मालवा के प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुंड इन दिनों बदहाली का शिकार है। कमल कुंड के नाम से पहचाने जाने वाले इस कुंड का पानी बेहद गंदा और काफी कम हो चुका है, जिसके चलते यहां मौजूद कछुओं और अन्य जलजीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। भीषण गर्मी के बीच हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं, लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक जिम्मेदारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। दरअसल बैजनाथ मंदिर परिसर में इन दिनों जीर्णोद्धार और नवीन निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसी दौरान मंदिर के पीछे स्थित प्राचीन कुंड की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। कुंड में पानी की मात्रा लगातार घटती जा रही है और जो पानी बचा है वह भी गंदगी से भर चुका है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुंड में मौजूद कई कछुए गंभीर पीड़ा और जीवन संकट का सामना कर रहे हैं। तेज गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण जलजीवों के दम तोड़ने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय नागरिकों ने करीब एक सप्ताह पहले जनसुनवाई में कलेक्टर को शिकायत देकर कछुओं को मोतीसागर तालाब या किसी सुरक्षित जलाशय में विस्थापित करने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो कई बेजुबान जीवों की मौत हो सकती है। नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल मानवीय संवेदनाओं और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में मंदिर के पुजारी द्वारा भी कलेक्टर को पत्र सौंपे जाने की बात कही गई है। मामले को लेकर एसडीएम मिलिंद ढोके ने कहा है कि मामला प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है। कछुओं को शिफ्ट करने के लिए संबंधित वन विभाग को जानकारी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि ऐसे जीवों को स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक अनुमति लेना पड़ती है। अनुमति मिलने तक पास में ही किसी बड़े जलस्रोत में इन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाएगी।अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी संवेदनशीलता से लेता है और इन बेजुबान जलजीवों को बचाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।