Monday, 28 September 2026
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आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत: रेप केस में सजा बरकरार, जमानत याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस

संक्षेप में

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के यौन शोषण मामले में दोषी आसाराम की जमानत और सजा पर रोक लगाने की मांग को फिलहाल ठुकरा दिया है, लेकिन उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

मुख्य बातें

  • आसाराम की जमानत याचिका को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया
  • राजस्थान सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
  • आसाराम को जेल में मेडिकल सुविधाएं जारी रखने का आदेश
  • 2013 में जोधपुर आश्रम में नाबालिग छात्रा के यौन शोषण का था मामला
जयपुर संभाग
आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत: रेप केस में सजा बरकरार, जमानत याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आसाराम की जमानत और सजा पर रोक लगाने की मांग को फिलहाल ठुकरा दिया है। जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने 2013 के यौन शोषण मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली आसाराम की याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक राज्य का पक्ष नहीं सुना जाता, तब तक किसी भी तरह की अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी। बेंच ने कहा, "हम अभी जमानत नहीं दे रहे हैं। यदि आसाराम की जान को कोई गंभीर खतरा होता है या स्वास्थ्य की स्थिति अत्यंत नाजुक होती है, तो ही हम इस पर विचार करेंगे।"

स्वास्थ्य सुविधाओं पर जारी रहेगा उपचार अदालत ने राजस्थान सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि आसाराम को जेल में जो मेडिकल सुविधाएं मिल रही हैं, वे जारी रहेंगी। साथ ही, आसाराम को यह छूट दी गई है कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ती है, तो वे मामले की तत्काल सुनवाई के लिए आवेदन कर सकते हैं।

दलीलों का दौर आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने उनकी 80 वर्ष से अधिक उम्र और कई बीमारियों का हवाला देते हुए जमानत की गुहार लगाई। उन्होंने तर्क दिया कि आसाराम का मामला 'सोशल मीडिया ट्रायल' से प्रभावित रहा है।

वहीं, राज्य सरकार और पीड़िता के वकील ने अंतरिम राहत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आसाराम को जरूरत पड़ने पर उचित उपचार दिया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इसी महीने उन्हें अस्पताल ले जाया गया था और मेडिकल रिपोर्ट में कोई जीवन के लिए खतरा जैसी स्थिति नहीं पाई गई है।

क्या है पूरा मामला? अगस्त 2013 में जोधपुर के मनाई स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के यौन शोषण का मामला सामने आया था। अप्रैल 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आसाराम को ताउम्र जेल की सजा सुनाई थी। इसी साल मई में राजस्थान हाईकोर्ट ने रेप और अन्य अपराधों में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा, हालांकि गैंगरेप और आपराधिक साजिश के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने इसी मामले में सह-आरोपियों शरद चंद्र और संचिता शिल्पी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को जमानत दे दी है?

नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आसाराम को जमानत देने या उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से क्या कहा है?

कोर्ट ने आसाराम की याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

आसाराम किस मामले में सजा काट रहे हैं?

आसाराम 2013 में जोधपुर के आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के यौन शोषण और डराने-धमकाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

कोर्ट ने स्वास्थ्य संबंधी राहत पर क्या टिप्पणी की?

कोर्ट ने कहा कि यदि आसाराम की जान को गंभीर खतरा या स्वास्थ्य की अत्यंत नाजुक स्थिति साबित होती है, तो ही जमानत पर विचार किया जाएगा।