राजस्थान के इस बांध में सबसे ज्यादा 33 गेट! पहली बार खुले 13 गेट, फिर भी आम लोगों को नहीं मिलता पानी

झालावाड़ जिले में कालीसिंध नदी पर बने कालीसिंध बांध के गेट इस सीजन में पहली बार खोले गए। 10 अगस्त को पानी की तेज आवक के बाद बांध के 33 में से 13 गेट खोलकर पानी छोड़ा गया था। इसके बाद जल निकासी घटाकर बुधवार को तीन गेटों से पानी छोड़ा जा रहा है। कालीसिंध बांध की खासियत यह है कि राजस्थान के किसी अन्य बड़े बांध में इतने गेट नहीं हैं। इसके बावजूद बांध में भरपूर पानी होने के बाद भी इसका इस्तेमाल आम लोगों के पेयजल और किसानों की सिंचाई के लिए नहीं किया जाता। बांध का पानी मुख्य रूप से 1200 मेगावाट क्षमता वाले कालीसिंध सुपर थर्मल पावर प्लांट के लिए इस्तेमाल होता है।

1. कालीसिंध बांध में सबसे ज्यादा 33 गेट

झालरापाटन क्षेत्र में बना कालीसिंध बांध राज्य की प्रमुख जल परियोजनाओं में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके 33 रेडियल गेट हैं। अधिकारियों के अनुसार राज्य के अन्य बड़े बांधों की तुलना में कालीसिंध में सबसे ज्यादा गेट हैं। कोटा बैराज में 19, बीसलपुर बांध में 18 और माही डैम में 16 गेट हैं।

2. एक बटन से खुलते हैं गेट

कालीसिंध बांध के सभी 33 गेट आधुनिक तकनीक से संचालित होते हैं। प्रत्येक गेट करीब 10 मीटर गुणा 15 मीटर आकार का है। इनके संचालन के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से जरूरत के अनुसार गेट खोले और बंद किए जा सकते हैं। प्रत्येक गेट में जर्मनी निर्मित करीब 10 मीटर स्ट्रोक लेंथ वाले हाइड्रोलिक सिलेंडर लगाए गए हैं।

3. 20 मिनट में खुल सकते हैं सभी 33 गेट

बांध में अचानक पानी की आवक बढ़ने पर इसकी आधुनिक गेट प्रणाली काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग के अनुसार जरूरत पड़ने पर सभी 33 गेट करीब 20 मिनट में पूरी क्षमता तक खोले जा सकते हैं। इससे अतिरिक्त पानी तेजी से बाहर निकालने और बांध पर पानी का दबाव नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

4. 13 गेट से घटकर तीन गेट से हो रही निकासी

10 अगस्त को पानी की तेज आवक के बाद 13 गेट खोले गए थे। इसके बाद 11 अगस्त को पांच गेट करीब 8 मीटर तक खोलकर लगभग 32,248 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बुधवार को पानी की निकासी तीन गेटों से की जा रही है, जिन्हें करीब साढ़े 3 मीटर तक खोला गया है। फिलहाल बांध का जलस्तर करीब 313.5 मीटर बताया गया है।

5. बांध भरा, फिर भी आम लोगों को नहीं मिलता पानी

कालीसिंध बांध में पर्याप्त पानी होने के बावजूद इसका सीधा लाभ आम लोगों और किसानों को नहीं मिलता। बांध से मुख्य रूप से कालीसिंध सुपर थर्मल पावर प्लांट को पानी दिया जाता है। इसके अलावा कुछ पानी रीको इंडस्ट्रियल एरिया और हॉर्टिकल्चर कॉलेज के लिए भी उपलब्ध कराया जाता है। फिलहाल बांध से पेयजल और सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा रहा है।

2014 से थर्मल प्लांट को मिल रहा पानी

कालीसिंध बांध से साल 2014 से थर्मल पावर प्लांट के लिए पानी की आपूर्ति की जा रही है। बांध का निर्माण सिंचाई विभाग के जरिए कराया गया था और परियोजना के लिए थर्मल पावर प्रोजेक्ट की ओर से बजट उपलब्ध कराया गया था। परियोजना की शुरुआती लागत करीब 766.22 करोड़ रुपए बताई गई थी।

क्यों खास है कालीसिंध बांध?

कालीसिंध बांध का निर्माण जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और बिजली उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया था। इसके 33 आधुनिक रेडियल गेट इसे राजस्थान के अन्य बड़े बांधों से अलग बनाते हैं। हालांकि बांध में पानी होने के बावजूद आसपास के ग्रामीणों को पेयजल और सिंचाई के लिए इसका सीधा लाभ नहीं मिलना एक अहम सवाल बना हुआ है।