राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव के मद्देनजर किसानों को राहत देते हुए 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स' (FFS) यानी फार्मर आईडी के जरिए डीएपी-यूरिया देने की अनिवार्यता को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया है। कोटा समेत प्रदेश के 18 जिलों में इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। कृषि आयुक्तालय ने इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भेजकर योजना पर रोक लगाने की जानकारी दी है।
लोकसभा अध्यक्ष से की गई थी शिकायत
हाड़ौती क्षेत्र के किसान संगठनों ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर इस ऑनलाइन प्रणाली से आ रही दिक्कतों के बारे में बताया था। किसानों का कहना था कि ऐप पर रजिस्ट्रेशन न होने, ऑनलाइन स्लॉट बुक करने में आ रही तकनीकी बाधाओं और बंटाईदार किसानों के नाम दर्ज न होने की वजह से खाद मिलने में भारी परेशानी हो रही है।
ज्ञापन सौंपकर योजना को स्थगित करने की मांग की गई थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार से बात कर किसानों को राहत दिलाने का आश्वासन दिया था। कोटा खंड के कृषि विस्तार संयुक्त निदेशक अतिशकुमार शर्मा ने बताया कि योजना को स्थगित करने के आदेश मिल चुके हैं और अब किसानों को पुराने नियमों के तहत आधार कार्ड और जमाबंदी पर ही खाद उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों के सुझाव और अभियान बना आधार
कृषि विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि एग्रीस्टेक योजना के तहत हाल ही में कुछ जिलों में एफएफएस प्रणाली लागू की गई थी। इस डिजिटल बिक्री प्रक्रिया के दौरान किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ कई व्यावहारिक सुझाव और अभ्यावेदन भी प्राप्त हुए थे।
इसके साथ ही राज्य में एक से 30 सितंबर तक एग्रीस्टेक फार्मर पहचान पत्र बनाने और भू-राजस्व ग्रामों का भूमि रेकॉर्ड डिजिटल करने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं और मैदानी स्तर पर आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को फिलहाल रोकने का आग्रह किया गया है। कृषि आयुक्तालय, जयपुर की ओर से यह पत्र भारत सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के निदेशक को भेजा गया है, जिसकी एक प्रति पीएमओ को भी भेजी गई है।
