Tuesday, 22 September 2026
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कोटा: पंचायत चुनाव से ठीक पहले बड़ा फैसला; फार्मर आईडी से खाद वितरण की अनिवार्यता टाल दी गई

संक्षेप में

राजस्थान सरकार ने पंचायत चुनाव के मद्देनजर कोटा समेत 18 जिलों में फार्मर आईडी के जरिए डीएपी-यूरिया खाद देने की 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स' अनिवार्यता को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया है। किसानों की शिकायतों और तकनीकी दिक्कतों के बाद यह फैसला लिया गया है, और अब किसानों को आधार व जमाबंदी पर खाद मिलेगा।

मुख्य बातें

  • राज्य सरकार ने फार्मर आईडी से खाद वितरण की अनिवार्यता को आगामी आदेशों तक टाला।
  • कोटा समेत प्रदेश के 18 जिलों में लागू FFS योजना को किया गया स्थगित।
  • कृषि आयुक्तालय, जयपुर ने भारत सरकार के डिजिटल कृषि मिशन को भेजा पत्र।
  • किसानों को अब आधार कार्ड और कृषि भूमि की जमाबंदी के आधार पर मिलेगा खाद।
आपणो राजस्थान
कोटा: पंचायत चुनाव से ठीक पहले बड़ा फैसला; फार्मर आईडी से खाद वितरण की अनिवार्यता टाल दी गई

राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव के मद्देनजर किसानों को राहत देते हुए 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स' (FFS) यानी फार्मर आईडी के जरिए डीएपी-यूरिया देने की अनिवार्यता को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया है। कोटा समेत प्रदेश के 18 जिलों में इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। कृषि आयुक्तालय ने इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भेजकर योजना पर रोक लगाने की जानकारी दी है।

लोकसभा अध्यक्ष से की गई थी शिकायत

हाड़ौती क्षेत्र के किसान संगठनों ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर इस ऑनलाइन प्रणाली से आ रही दिक्कतों के बारे में बताया था। किसानों का कहना था कि ऐप पर रजिस्ट्रेशन न होने, ऑनलाइन स्लॉट बुक करने में आ रही तकनीकी बाधाओं और बंटाईदार किसानों के नाम दर्ज न होने की वजह से खाद मिलने में भारी परेशानी हो रही है।

ज्ञापन सौंपकर योजना को स्थगित करने की मांग की गई थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार से बात कर किसानों को राहत दिलाने का आश्वासन दिया था। कोटा खंड के कृषि विस्तार संयुक्त निदेशक अतिशकुमार शर्मा ने बताया कि योजना को स्थगित करने के आदेश मिल चुके हैं और अब किसानों को पुराने नियमों के तहत आधार कार्ड और जमाबंदी पर ही खाद उपलब्ध कराया जाएगा।

किसानों के सुझाव और अभियान बना आधार

कृषि विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि एग्रीस्टेक योजना के तहत हाल ही में कुछ जिलों में एफएफएस प्रणाली लागू की गई थी। इस डिजिटल बिक्री प्रक्रिया के दौरान किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ कई व्यावहारिक सुझाव और अभ्यावेदन भी प्राप्त हुए थे।

इसके साथ ही राज्य में एक से 30 सितंबर तक एग्रीस्टेक फार्मर पहचान पत्र बनाने और भू-राजस्व ग्रामों का भूमि रेकॉर्ड डिजिटल करने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं और मैदानी स्तर पर आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को फिलहाल रोकने का आग्रह किया गया है। कृषि आयुक्तालय, जयपुर की ओर से यह पत्र भारत सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के निदेशक को भेजा गया है, जिसकी एक प्रति पीएमओ को भी भेजी गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान में फार्मर आईडी से खाद वितरण की अनिवार्यता क्यों टाली गई है?

पंचायत चुनाव के मद्देनजर किसानों के विरोध और तकनीकी समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स' (FFS) के जरिए खाद वितरण की अनिवार्यता को स्थगित कर दिया है।

किसानों को अब किस आधार पर डीएपी और यूरिया मिलेगा?

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फार्मर आईडी की अनिवार्यता टलने के बाद किसानों को अब पहले की तरह आधार कार्ड और कृषि भूमि की जमाबंदी के आधार पर खाद दिया जाएगा।

किन जिलों में यह योजना लागू की गई थी?

हाल ही में राजस्थान के 18 जिलों में एग्रीस्टेक योजना के तहत 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स' प्रणाली को लागू किया गया था, जिसे अब आगामी आदेशों तक रोक दिया गया है।

इस फैसले के पीछे मुख्य वजह क्या रही?

ऐप पर रजिस्ट्रेशन में दिक्कत, स्लॉट बुकिंग की समस्या, बंटाईदार किसानों के नाम न जुड़ने और डिजिटल पहचान पत्र बनाने के विशेष अभियान को देखते हुए कृषि आयुक्तालय ने यह कदम उठाया है।