जयपुर में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय अहम बैठक हो रही है। बैठक में वैश्विक वित्तीय सुधार, सीमा पार भुगतान, डिजिटल करेंसी और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। विकासशील देशों के लिए निवेश और पूंजी की उपलब्धता बढ़ाने पर भी मंथन किया जाएगा। भारत की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा बैठक में शामिल हैं।
1. वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार पर चर्चा
जयपुर में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार है। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं चाहती हैं कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में उनकी भूमिका और भागीदारी बढ़े। इसी को लेकर बैठक में वित्तीय स्थिरता, निवेश, विकास वित्त और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा होगी।
2. सीमा पार भुगतान को आसान बनाने पर मंथन
BRICS देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, इसलिए तेज और कम लागत वाली भुगतान व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ रही है। बैठक में सदस्य देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य देशों के बीच होने वाले भुगतान को ज्यादा आसान, तेज और कम खर्चीला बनाना है।
3. डिजिटल करेंसी और CBDC पर फोकस
बैठक में केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC को लेकर भी चर्चा अहम रहेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा BRICS देशों की डिजिटल भुगतान व्यवस्थाओं को जोड़ने की संभावनाओं पर पहले ही बात कर चुके हैं। अगर ऐसी व्यवस्था विकसित होती है तो भविष्य में सीमा पार डिजिटल लेन-देन को ज्यादा सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
4. स्थानीय मुद्राओं और रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा
BRICS देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में दूसरी प्रमुख मुद्राओं पर निर्भरता कम करना और सदस्य देशों के बीच सीधे भुगतान की संभावनाएं बढ़ाना है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
5. विकासशील देशों के लिए निवेश और पूंजी जुटाना
BRICS बैठक में विकासशील देशों के लिए पूंजी और निवेश की उपलब्धता बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास प्रोजेक्ट्स के लिए इन देशों को बड़ी मात्रा में वित्तीय संसाधनों की जरूरत होती है। इसलिए निजी निवेश को आकर्षित करने, विकास वित्त को मजबूत करने और वैश्विक आर्थिक फैसलों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया जाएगा।
