उत्तर पश्चिम रेलवे के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल बठिंडा-लालगढ़ रेल दोहरीकरण परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत 320.17 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर दूसरी लाइन बिछाई जाएगी। करीब 3,435.77 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को स्पेशल रेल प्रोजेक्ट का दर्जा मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन में तेजी आई है। रेलवे ने इसे चार साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।

यह रेलखंड पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुल छह जिलों से होकर गुजरेगा। डीपीआर के मुताबिक, इस परियोजना में पंजाब के बठिंडा और श्रीमुक्तसर साहिब, हरियाणा के सिरसा तथा राजस्थान के हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और बीकानेर जिले शामिल हैं। प्रोजेक्ट के लिए कुल 125.5 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। उत्तर-पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ अमित सुदर्शन ने बताया कि इस लाइन के बनने से न सिर्फ यात्री सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि माल परिवहन की क्षमता भी कई गुना बढ़ जाएगी।

औद्योगिक और कृषि परिवहन को मिलेगी नई गति

यह पूरा रेलखंड राजस्थान के प्रमुख कृषि क्षेत्रों को पंजाब और हरियाणा से जोड़ता है। डबल ट्रैक बनने के बाद कृषि उपज और औद्योगिक सामान की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सकेगी। सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला रैक के संचालन में भी इससे बड़ा सुधार आएगा। व्यस्त रहने वाले इस रूट पर अब ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए लंबे समय तक स्टेशनों पर नहीं रोकना पड़ेगा। इस पूरे मार्ग पर कुल 33 स्टेशन आते हैं, जिनमें चार जंक्शन, 25 क्रॉसिंग स्टेशन और चार हॉल्ट स्टेशन शामिल हैं।

इंजीनियरिंग के लिहाज से बड़े पैमाने पर निर्माण

इस परियोजना में तकनीकी और सिविल इंजीनियरिंग के बड़े पैमाने पर काम होंगे। डीपीआर के अनुसार, निर्माण के दौरान 15.38 लाख घनमीटर अर्थवर्क और 13.11 लाख घनमीटर ब्लैंकेटिंग का काम किया जाएगा। रूट पर आने वाली नदियों और नहरों पर छह मेजर और 106 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे। इसके अलावा संरक्षा और सुगम यातायात के लिए कुल 96 आरयूबी और एलएचएस (रोड अंडर ब्रिज/लो हाइट सबवे) का प्रावधान किया गया है। इनमें 56 नए आरयूबी/एलएचएस बनाए जाएंगे, जबकि यातायात के दबाव को कम करने के लिए 40 लेवल क्रॉसिंग को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।