मानसून की बेरुखी और लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। ग्राम सतावडियां के राजस्व गांव चावण्डिया सहित आसपास के क्षेत्रों में बारिश के अभाव में खेतों में खड़ी विभिन्न फसलें झुलसने लगी हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने इन्द्र देव को प्रसन्न करने और अच्छी बारिश की कामना को लेकर सदियों पुरानी परंपरा ‘बासासूण’ का आयोजन किया।

शनिवार को चावण्डिया गांव में ग्रामीण अलसुबह अपने मवेशियों के साथ गांव से बाहर निकले। इस दौरान महिलाओं, पुरुषों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बासासूण मनाया। ग्रामीणों ने इन्द्र देव को प्रसन्न करने के लिए खीर, चूरमा और बाटी का भोग लगाया तथा अच्छी बारिश, फसल की खुशहाली और गांव में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए मन्नत मांगी।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि बासासूण मनाने की परंपरा गांव में सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि जब बारिश रूठ जाती है और खेतों में खड़ी फसलों पर संकट मंडराने लगता है, तब ग्रामीण सामूहिक रूप से गांव से बाहर निकलकर इन्द्र देव को मनाते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा के माध्यम से इन्द्र देव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है।

इससे पूर्व ग्रामीणों ने पूरे गांव के चारों ओर अखंड ज्योत प्रज्वलित कर सामूहिक रूप से परिक्रमा लगाई। गांव के प्रत्येक वर्ग के लोगों ने इसमें भाग लिया। ढोल-ढमाकों और इन्द्र देव के जयकारों के बीच ग्रामीणों ने गांव की परिक्रमा की। इस दौरान पूरे गांव का माहौल भक्तिमय हो गया और जगह-जगह इन्द्र देव के जयकारे गूंजते रहे।

ग्रामीणों ने कहा कि खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। समय पर बारिश नहीं होने से किसानों के सामने फसलों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार सामूहिक रूप से इन्द्र देव को मनाकर जल्द बारिश होने की प्रार्थना की।इस अवसर पर समाजसेवी हेमराज गुर्जर, समाजसेवी सेक्रेटरी भोलू गुर्जर, रामसुख गुर्जर, दयाल गुर्जर, नारायण प्रजापत, हरदेव गुर्जर, शैतान गुर्जर, प्रभू गुर्जर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं समस्त चावण्डिया ग्रामवासी मौजूद रहे।

बारिश के इंतजार में ग्रामीणों ने आस्था और परंपरा का सहारा लेते हुए इन्द्र देव को मनाया। अब सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी सामूहिक प्रार्थना रंग लाएगी, इन्द्र देव प्रसन्न होंगे और जल्द ही क्षेत्र में झमाझम बारिश होकर सूखती फसलों को राहत मिलेगी।