चुनाव से पहले भजनलाल सरकार का बड़ा दांव, 788 करोड़ के विकास कार्यों को रफ्तार; 192 गांवों में बनेंगी सड़कें

राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव से पहले भजनलाल सरकार ने शहरों से लेकर गांवों तक बुनियादी सुविधाओं से जुड़े बड़े प्रोजेक्टों को रफ्तार देने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने करीब 788 करोड़ रुपए के सड़क और पेयजल विकास कार्यों का रास्ता साफ किया है। इनमें जयपुर में अमृत-2 योजना के तहत करीब 406 करोड़ रुपए के पेयजल कार्य और 5 हजार से अधिक आबादी वाले 192 गांवों में 381.91 करोड़ रुपए की लागत से अटल प्रगति पथ शामिल हैं।

इन परियोजनाओं का मकसद शहरों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करना और गांवों में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करना है। हालांकि चुनावी आचार संहिता के चलते जयपुर के पेयजल प्रोजेक्टों का वास्तविक काम शुरू होने में समय लग सकता है।

1. जयपुर में 406 करोड़ से बदलेगा पेयजल सिस्टम

अमृत-2 योजना के तहत जयपुर के अलग-अलग डिवीजनों में करीब 406 करोड़ रुपए के काम प्रस्तावित हैं। इनमें 450 एमएम की राइजिंग पाइपलाइन, 3500 किलोलीटर तक क्षमता वाले स्वच्छ जलाशय, 1750 किलोलीटर तक की पानी की टंकियां और करीब 19 लाख मीटर लंबी डीआई व एचडीपीई पाइपलाइन बिछाने के काम शामिल हैं।

इन परियोजनाओं से जयपुर में पेयजल वितरण व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों को पर्याप्त दबाव के साथ पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। शहर का मौजूदा वितरण तंत्र काफी पुराना हो चुका है, इसलिए नई पाइपलाइन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

2. 192 गांवों में 286 किलोमीटर सड़कें

सरकार ने 5 हजार से अधिक आबादी वाले शेष 192 गांवों के लिए अटल प्रगति पथ योजना के तहत 381.91 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी है। इन गांवों में करीब 286 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।

यह काम राजस्थान के 28 जिलों में होगा। इससे गांवों और उनसे जुड़ी ढाणियों की मुख्य सड़कों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और ग्रामीण इलाकों में आवागमन आसान होने की उम्मीद है।

3. गांवों में सड़क से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

ग्रामीण इलाकों में अच्छी सड़कें सिर्फ आवागमन के लिए जरूरी नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार पर भी पड़ता है। पक्की और मजबूत सड़कें बनने से ग्रामीण आबादी को नजदीकी कस्बों और शहरों तक पहुंचने में सुविधा होगी।

बारिश के मौसम में खराब होने वाली सड़कों की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकती है। इसके अलावा किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में भी बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा मिल सकता है।

4. जयपुर की पुरानी पेयजल व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

जयपुर में बीसलपुर सिस्टम से पानी की सप्लाई बढ़ने के साथ ही शहर के अंदर वितरण नेटवर्क को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है। कई इलाकों में पुरानी पाइपलाइन और कमजोर वितरण व्यवस्था के कारण पानी के दबाव और सप्लाई से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं।

नई पाइपलाइन, जलाशय और टंकियों के निर्माण से भविष्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए आधारभूत ढांचा तैयार होगा। सरकार की योजना शहर के पेयजल तंत्र को आधुनिक और ज्यादा प्रभावी बनाने की है।

5. चुनाव से पहले विकास का सियासी संदेश

इन परियोजनाओं का एक राजनीतिक पहलू भी है। निकाय और पंचायत चुनाव से पहले सड़क और पानी जैसे सीधे जनता से जुड़े मुद्दों पर बड़े प्रोजेक्टों को मंजूरी मिलने से सरकार को अपने विकास कार्यों को जनता के सामने रखने का मौका मिलेगा।

हालांकि आचार संहिता लागू होने की स्थिति में कई कामों की टेंडर और निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सरकार की ओर से संकेत है कि पेयजल परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी और आचार संहिता समाप्त होने के बाद धरातल पर काम शुरू किया जा सकेगा।

क्या बदलेगा?

कुल मिलाकर करीब 788 करोड़ रुपए के इन प्रोजेक्टों में जयपुर के लिए 406 करोड़ रुपए का पेयजल इंफ्रास्ट्रक्चर और 192 गांवों के लिए 381.91 करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। एक तरफ जयपुर में पुरानी पेयजल वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण राजस्थान में करीब 286 किलोमीटर सड़कों के जरिए कनेक्टिविटी सुधारने की कोशिश की जा रही है। अब इन योजनाओं की असली तस्वीर टेंडर प्रक्रिया और निर्माण शुरू होने के बाद ही सामने आएगी।