पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल यानी E20 मिलाने के फैसले को लेकर चल रहे विरोध के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ किया है कि वाहन निर्माताओं पर ऐसा करने का कोई दबाव नहीं था। मंत्रालय ने गुरुवार को उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें सोशल मीडिया पर कहा जा रहा था कि ऑटोमेकर प्राइवेट तौर पर E20 को सही नहीं मान रहे हैं।

देश में पिछले साल पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया था और फिलहाल यही मानक ईंधन देश भर के पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है। हालांकि, पुरानी गाड़ियों के इंजन में टूट-फूट और माइलेज घटने की शिकायतों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

वाहन निर्माताओं के रुख पर क्या बोला मंत्रालय?

मंत्रालय के मुताबिक, अगर ऑटोमोबाइल कंपनियां वैज्ञानिक परीक्षणों से संतुष्ट नहीं होतीं, तो वे कभी भी E20-अनुकूल वाहनों को प्रमाणित नहीं करतीं और न ही वारंटी obligations को पूरा करतीं। कंपनियों के पास अपने ग्राहकों के प्रति कानूनी और नियामक जिम्मेदारियां हैं, और वे किसी भी हाल में बड़े पैमाने पर वाहनों में खराबी को छिपा नहीं सकतीं।

सरकार ने चार जुलाई की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए बताया कि मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ सर्विकेड वाहनों का डेटा विश्लेषण किया था। इसमें 1.5 करोड़ से ज्यादा पुरानी गाड़ियां भी शामिल थीं, जिनमें E20 की वजह से किसी भी तरह के संक्षारण (corrosion), असामान्य घिसाव या कंपोनेंट की उम्र घटने का कोई मामला सामने नहीं आया।

इसी तरह, हीरो मोटोकॉर्प और टोयोटा किर्लोस्कर ने भी अपने सेवा डेटा और UNECE मानकों के तहत किए गए परीक्षणों के आधार पर ईंधन को सुरक्षित बताया है।

क्या पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंच रहा है?

पेट्रोल वाहन निर्माताओं के मुताबिक, अप्रैल 2023 के बाद बनने और बिकने वाले वाहन पूरी तरह से E20-compliant हैं, क्योंकि इन्हें बीएस-6 फेज-2 उत्सर्जन नियमों के तहत अनिवार्य किया गया था। हालांकि, 2023 से पहले बिक चुकी अधिकांश गाड़ियां इस मानक के तहत नहीं आती हैं।

पुरानी गाड़ियों के मामले में सरकार का तर्क है कि माइलेज में अधिकतम 3 से 5 प्रतिशत तक की ही गिरावट आ सकती है, जिसकी भरपाई उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर पिकअप और क्लीन इंजन ऑपरेशन जैसे फायदों से हो जाती है। इसके अलावा, ARAI, SIAM, IOC और IIP द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षणों में भी E20 को मानकों के तहत सुरक्षित पाया गया है।

आगे क्या है सरकार की योजना?

बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में अगर ब्लेंडिंग बढ़ाई जाती है, तो वह विस्तृत अध्ययन और सभी शेयरधारकों के साथ परामर्श के बाद ही तय होगा। इसके अलावा, ईंधन स्टेशनों पर कम एथेनॉल मिश्रण या शुद्ध पेट्रोल को अलग से बेचने की भी कोई योजना नहीं है।

एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2013-14 में जहां ब्लेंडिंग औसतन 1.5 प्रतिशत थी, वह 2021-22 में बढ़कर 10% और अब 20% तक पहुंच चुकी है।