दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई भी शिक्षण संस्थान 'नो रिफंड पॉलिसी' (No Refund Policy) की आड़ में ग्राहकों को रिफंड देने से मना नहीं कर सकता है। आयोग ने 'फॉक्स ब्रेन किड्स ब्रेन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड' को एक अभिभावक को 30,000 रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है।

मामला क्या था? पूर्वी दिल्ली के रहने वाले शांतनु ने अपने चार साल के बेटे का आईक्यू (IQ) बढ़ाने के लिए इस संस्थान में दाखिला लिया था। शिकायत के मुताबिक, उन्हें मार्च 2023 में फोन पर वैज्ञानिक तरीकों से बच्चे की बुद्धिमत्ता बढ़ाने का वादा किया गया था। पिता ने 40,000 रुपये का शुल्क जमा किया। हालांकि, 26 मार्च 2023 को पहली क्लास के बाद ही उन्होंने पाया कि वहां वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं थीं और एक नाबालिग लड़की बच्चों को डांस सिखा रही थी। जब उन्होंने रिफंड मांगा, तो संस्थान ने अपनी 'नो रिफंड पॉलिसी' का हवाला देकर इनकार कर दिया।

कमीशन की टिप्पणी पूर्वी दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष सुखवीर सिंह मल्होत्रा और सदस्य रवि कुमार ने कहा कि 'नो रिफंड पॉलिसी' का दावा करना अपने आप में अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी (Deficiency in service) है। आयोग ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को रिफंड की शर्तों में लचीलापन रखना चाहिए, विशेषकर तब जब संस्थान वादे के अनुरूप माहौल देने में विफल रहे।

आयोग ने स्पष्ट किया कि अभिभावक ने बिना पर्याप्त शोध के दाखिला लिया था, इसलिए उन्हें पूरा रिफंड नहीं दिया जा सकता। संतुलित रुख अपनाते हुए, आयोग ने संस्थान को जमा 40,000 रुपये में से 30,000 रुपये (75 फीसदी) लौटाने का आदेश दिया है।

ब्याज और अनुपालन आदेश के अनुसार, संस्थान को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ राशि का भुगतान करना होगा। यदि संस्थान 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो ब्याज दर बढ़कर 9 फीसदी प्रति वर्ष हो जाएगी। संस्थान इस मामले में नोटिस मिलने के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने एकतरफा (Ex-parte) फैसला सुनाया।

यह फैसला उन छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है जो शिक्षण संस्थानों द्वारा फीस वापस न करने की मनमानी नीतियों से परेशान हैं। उपभोक्ता किसी भी शिकायत के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं।