मोहर्रम के यौमे-आशूरा पर आज जयपुर में आस्था, श्रद्धा और मातम का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। जहां  हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहरभर के अकीदतमंद रोजे रखकर इबादत करेंगे और 320 से अधिक ताजियों के जुलूस पारंपरिक मार्गों से चांदपोल, छोटी-बड़ी चौपड़ और जोरावर सिंह गेट होते हुए कर्बला पहुंचेंगे, जहां धार्मिक परंपरा के मुताबिक उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। वहीं शिया समुदाय की ओर से शेरपुर हाउस में मजलिस के बाद अलम और ताजियों के साथ मातमी जुलूस निकलेगा, जो शाम को कर्बला पहुंचने पर मातम के साथ संपन्न होगा। मोहर्रम के चलते जयपुर में तैयार किए गए आकर्षक ताजिए भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं, जिनमें शाही परिवार के सोने-चांदी के ताजिए और करीब 20 फीट ऊंचा ताजिया विशेष रूप से चर्चा में हैं। इस अवसर पर जौहरी बाजार स्थित ऐतिहासिक सलीम मंजिल में संरक्षित शहीदे कर्बला हजरत इमाम हुसैन की करीब 145 वर्ष पुरानी पवित्र कुलाहे मुबारक की जियारत का भी आज अंतिम दिन है। ऐसा बताया जाता है कि वर्ष 1876 में अफगानिस्तान के बादशाह ने इसे जयपुर के प्रसिद्ध हकीम सलीम खान को भेंट किया था। हर साल मोहर्रम की 9 और 10 तारीख को हजारों अकीदतमंद यहां पहुंचकर जियारत करते हैं और अपनी मुरादें मांगते हैं। यह पवित्र धरोहर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि जयपुर की गंगा-जमुनी तहजीब, सांप्रदायिक सौहार्द और शिया-सुन्नी एकता की एक अनूठी मिसाल भी मानी जा रही  है।