बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पिछले 18 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। आलम यह है कि शेगांव रोड स्थित नाले का पुल पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और पानी पुल के कई फीट ऊपर से बह रहा है।हैरान करने वाली बात यह है कि इसी डूबते पुल से रोजाना सैकड़ों स्कूली बच्चे और प्रसिद्ध भिलट देव शिखर धाम जाने वाले श्रद्धालु अपनी जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। आसमान से बरसती ये आफत और उफान मारता यह नाला बड़वानी के नागलवाड़ी का है... जहाँ पिछले 18 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह थाम दिया है।"अबयह शेगांव रोड को जोड़ने वाला मुख्य पुल है, जो अब टापू बन चुका है। पुल के ऊपर से बहते तेज पानी के कारण दोनों ओर का संपर्क टूट गया है और आवाजाही पूरी तरह ठप है।"लेकिन सबसे ज्यादा डराने वाली तस्वीर उन स्कूली बच्चों की है, जिन्हें हर रोज इसी मौत के रास्ते से गुजरना पड़ता है। सिर्फ बच्चे ही नहीं, प्रसिद्ध भिलट देव शिखर धाम आने वाले हजारों श्रद्धालु और स्थानीय किसान भी हर वक्त यहाँ हादसे के साए में जीते हैं।"स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या हर साल की है। मानसून आते ही यह पुल डूब जाता है। क्या प्रसाशन किसी हादसे का इन्जार कर रहा है "ग्रामीणों की मांग बेहद साफ है— इस पुल की ऊंचाई तुरंत बढ़ाई जाए, इसका चौड़ीकरण हो और दोनों तरफ मजबूत सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।"यह शेगांव रोड को जोड़ने वाला मुख्य पुल है, जो अब टापू बन चुका है। पुल के ऊपर से बहते तेज पानी के कारण दोनों ओर का संपर्क टूट गया है और आवाजाही पूरी तरह ठप है।" "लेकिन सबसे ज्यादा डराने वाली तस्वीर उन स्कूली बच्चों की है, जिन्हें हर रोज इसी मौत के रास्ते से गुजरना पड़ता है। सिर्फ बच्चे ही नहीं, प्रसिद्ध भिलट देव शिखर धाम आने वाले हजारों श्रद्धालु और स्थानीय किसान भी हर वक्त यहाँ हादसे के साए में जीते हैं।" स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या हर साल की है। मानसून आते ही यह पुल डूब जाता है ग्रामीणों की मांग बेहद साफ है— इस पुल की ऊंचाई तुरंत बढ़ाई जाए, इसका चौड़ीकरण हो और दोनों तरफ मजबूत सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।"अब आने वाला वक़्त ही बताएगा की प्रशासन इस मामले को लेकर कब कार्यवाही करता है या प्रशासन भी किसे बड़े हादसे के इन्तजार मे है