Friday, 23 October 2026
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इंदौर के इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य संगोष्ठी: डिजिटल दुनिया के दुष्प्रभावों और युवाओं पर असर को लेकर विशेषज्ञों ने रखी बात

संक्षेप में

इंदौर के इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने डिजिटल तकनीक के दुष्प्रभावों, युवाओं की मानसिक चुनौतियों और समय पर चिकित्सीय सहायता लेने की आवश्यकता पर चर्चा की।

मुख्य बातें

  • इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज, इंदौर में मानसिक स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
  • मालवांचल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. संजीव नारंग मुख्य अतिथि रहे।
  • डॉ. स्मृति जी. सोलोमन ने डिजिटल तकनीक के दुष्प्रभावों पर बात की।
  • डॉ. नितिन चिचोलकर ने युवाओं और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की।
मध्य प्रदेश
इंदौर के इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य संगोष्ठी: डिजिटल दुनिया के दुष्प्रभावों और युवाओं पर असर को लेकर विशेषज्ञों ने रखी बात

डिजिटल तकनीक और स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने की आदत आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर इंदौर के इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में आयोजित एक संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय पर पहचान और तकनीक के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया गया।

डिजिटल युग और बदलती जीवनशैली का असर

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मालवांचल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. संजीव नारंग ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को आज के समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय इसे समग्र स्वास्थ्य का अहम हिस्सा माना जाना चाहिए। समय पर उचित उपचार और विशेषज्ञों से परामर्श से ही इनसे निपटा जा सकता है।

डिजिटल तकनीक के प्रभाव पर बात करते हुए डॉ. स्मृति जी. सोलोमन ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं ने जीवन को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके नकारात्मक पहलू भी सामने आ रहे हैं। वास्तविक जीवन में संवाद और भावनात्मक जुड़ाव की जगह स्क्रीन ने ले ली है, जिससे हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं। इस स्थिति से बचने के लिए तकनीक का संतुलित उपयोग जरूरी है।

युवाओं और किशोरों की मानसिक चुनौतियां

कार्यक्रम के दौरान डॉ. नितिन चिचोलकर ने 'किशोरों एवं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां और सहयोग' विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि युवाओं की मानसिक स्थिति को गहराई से समझने और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने की जरूरत है। परिवार, शिक्षकों और समाज का सकारात्मक रवैया युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

डॉ. पायल शर्मा ने व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता अभियानों में शामिल होना काफी नहीं है, बल्कि मानसिक परेशानी महसूस होने पर खुद आगे आकर विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।

आयोजन से जुड़े प्रमुख बिंदु

यह संगोष्ठी चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया, वाइस चेयरमैन मयंक राज सिंह भदौरिया और डायरेक्टर दीपक मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम के अंत में श्रीमती संजना नायडू ने आभार व्यक्त किया। विशेषज्ञों का निष्कर्ष था कि संवेदनशील व्यवहार, सही मार्गदर्शन और समय पर मिलने वाली मदद से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को टाला जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इंडेक्स नर्सिंग कॉलेज में संगोष्ठी का मुख्य विषय क्या था?

संगोष्ठी का मुख्य विषय डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव और बदलती जीवनशैली के बीच मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां था।

डॉ. संजीव नारंग ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर क्या सुझाव दिया?

डॉ. संजीव नारंग ने मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय पर पहचान, उचित उपचार और इसे समग्र स्वास्थ्य का हिस्सा मानने पर जोर दिया।

डिजिटल तकनीक मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर रही है?

डॉ. स्मृति जी. सोलोमन के अनुसार, स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने और वास्तविक जीवन में संवाद कम होने से मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर किसने चर्चा की?

डॉ. नितिन चिचोलकर ने किशोरों एवं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों और परिवार-समाज की सकारात्मक भूमिका पर चर्चा की।