लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर छात्र शामिल थे। ये सभी छात्र गेमिंग और एनिमेशन की पढ़ाई के लिए कोचिंग में आते थे। हादसे के समय लंच के बाद सभी क्लास में मौजूद थे । शुरुआती जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था , साथ ही जानकारी के लिए बता दे की कोचिंग सेंटर में मुख्य गेट भी ऑटोमैटिक था, यह गेट थंब इम्प्रेशन से खुलता और बंद होता था। एक छात्र ने बताया कि आग लगने के दौरान थंब इंप्रेशन से खुलने वाला मुख्य गेट लॉक हो गया, इमारत में इमरजेंसी एग्जिट का कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। जिससे कई छात्र अंदर ही फंस गए। हादसे के वक्त करीब 30 स्टूडेंट और स्टाफ अंदर था। 8-10 स्टूडेंट इंटरनेट-डीटीएच का तार और पाइप पकड़कर बाहर निकल आए, जबकि 3-4 स्टूडेंट दूसरी मंजिल से नीचे कूद गए। अभी भी 5-6 घायल स्टूडेंट किंग जॉर्ज मेडिकल अस्पताल में एडमिट हैं। जिस बिल्डिंग में आग लगी है, उसकी जमीन वीरेंद्र शुक्ला के नाम पर है। वीरेंद्र शुक्ला रामेश्वरम इंजीनियरिंग कॉलेज के मालिक हैं। यह कॉलेज रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (RITM) के नाम से जाना जाता है। जांच में सामने आया है कि इमारत का नक्शा धीरेंद्र और सुरेंद्र शुक्ला के नाम पर पास हुआ था। शुरुआत में यह आवासीय भवन था, लेकिन 2014 में इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए मंजूरी मिल गई। पीड़ित परिवारों का कहना था कि गेमिंग जोन में एनीमेशन सेंटर का पूरा ढांचा ऑटोमैटिक था परिजनों का यह भी कहना है कि फायर ब्रिगेड की टीम आग लगने के करीब 40 मिनट बाद वहां पहुंची । एक युवक ने आग के डर से बिल्डिंग की खिड़की तोड़कर नीचे छलांग लगा दी, लेकिन वो सीधे नीचे नुकीली रेलिंग पर गिरा, रेलिंग सीधे पेट में घुसी और ज्यादा खून बहने से उसकी जान चली गई । आग बिल्डिंग के आगे के हिस्से में लगी थी, ऐसे में भयभीत बच्चे पीछे की ओर चले गए लेकिन धीरे-धीरे आग और धुआं पीछे के हिस्से तक पहुंच गया। ज्यादातर बच्चों की दम घुटने से जान चली गयी। इस बिल्डिंग को 2016 में अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो माह में ये ऑर्डर वापस से लिया गया था।