राजस्थान हाईकोर्ट ने कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जमानत याचिका को उसके निधन के बाद निरर्थक मानते हुए  बंद कर दिया है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद जमानत याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता, इसलिए मामले को समाप्त किया जाता है। यह याचिका धौलपुर जिले के बाड़ी थाना क्षेत्र में मार्च 2026 में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक मामले में दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुधीर जैन ने अदालत को जगन गुर्जर के निधन की जानकारी दी, जबकि राज्य सरकार की ओर से उप राजकीय अधिवक्ता जय प्रकाश तिवाड़ी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों की ओर से मृत्यु की पुष्टि किए जाने के बाद अदालत ने याचिका को सारहीन मानते हुए बंद कर दी गई.... 

बता दे जगन गुर्जर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था, जहां 29 जून 2026 को उसकी हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप उसके साथ बैरक में बंद कैदी विष्णु जाट पर है। प्रारंभिक जांच में आरोपी ने पुलिस को बताया था कि जगन उसे लगातार ताने मारता था, जिससे परेशान होकर उसने उसकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे। जगन गुर्जर चंबल क्षेत्र का कुख्यात डकैत था और उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, लूट, फिरौती समेत करीब 125 आपराधिक मामले दर्ज थे। उसकी हत्या के बाद प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी और उसके समर्थकों की गतिविधियों पर पुलिस ने विशेष नजर बनाये  रखी थी।