कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जयपुर जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस परियोजना के लिए जयपुर जिले की अंतिम सामाजिक समाघात रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसके तहत जिले की पांच तहसीलों के 50 गांवों के 13,480 परिवार प्रभावित होंगे।

209.5 किलोमीटर लंबे इस पूरे एक्सप्रेस-वे का एक बड़ा हिस्सा जयपुर जिले से गुजरेगा, जहां इसकी लंबाई 95.4 किलोमीटर होगी। यह एक एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा, यानी इस पर अनधिकृत वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा ताकि यातायात सुगम और सुरक्षित बना रहे।

क्या है परियोजना का दायरा और तकनीकी आंकड़े

परियोजना के तहत जयपुर जिले में 2,274 खसरों की कुल 1,022 हेक्टेयर निजी और 50 हेक्टेयर सरकारी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। एक्सप्रेस-वे का राइट-ऑफ-वे 90 मीटर चौड़ा रखा गया है और इसकी एम्बैंकमेंट (बंध) की ऊंचाई 2.5 से 13 मीटर तक होगी।

निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई है कि काटे जाने वाले हर एक पेड़ की एवज में कम से कम तीन नए पेड़ लगाए जाएं। इसके अलावा, जिन परिवारों के मकान या अन्य व्यावसायिक संरचनाएं इस दायरे में आ रही हैं, उनका सत्यापन और मूल्यांकन किया जा रहा है।

प्रभावित तहसीलें और गांव

यह एक्सप्रेस-वे कुल मिलाकर कोटपूतली, पाटन, नीम का थाना, खंडेला, श्रीमाधोपुर, रींगस, चौमूं, किशनगढ़-रेनवाल, जोबनेर, फुलेरा, दूदू, रूपनगढ़ और किशनगढ़ तहसीलों से होकर गुजरेगा।

जयपुर जिले के जिन 50 गांवों पर इसका असर पड़ेगा, उनमें शिवनगर, भूतेड़ा, हस्तेड़ा, विजय नगर, नोपा का बास, लालासर, जुनसिया, बाघावास, हरसोली, सुन्दरपुरा, पचकोड़िया, श्योसिंहपुरा, सुखालपुरा, मूण्डोती, चारणवास, डयोड़ी, शिम्भूपुरा, जोरपुरा, प्रतापपुरा, जगमालपुरा, गुमानपुरा, नरायना, नारदपुरा, साखून, लदेगा और सिरोहीकलां सहित अन्य इलाके शामिल हैं। इन प्रभावित परिवारों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के 1,743 परिवार भी शामिल हैं।

एनएच-48 पर दबाव कम करने की कवायद

सार्वजनिक निर्माण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में एनएच-48 पर वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या, सड़क की सीमित चौड़ाई और दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंता का विषय बन चुके हैं। राज्यों के बीच बढ़ती व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों के कारण इस मार्ग पर यातायात का दबाव काफी बढ़ गया है।

इसी दबाव को कम करने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास, व्यापार-वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को जरूरी बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि विस्थापित होने वाले परिवारों और विशेष रूप से एससी-एसटी वर्ग के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत विशेष पुनर्वास पैकेज तैयार किया जाए।