इंदौर में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की सफलता के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस अभियान को पूरे प्रदेश में विस्तार देने का फैसला किया है। पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि यह मुहिम अब राज्य के सभी जिलों तक ले जाई जाएगी, जिसके तहत कार्यकर्ता घर-घर जाकर शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

इस अभियान के जरिए कांग्रेस का जोर केजी से पीजी तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग उठाने पर है। इंदौर के कार्यक्रम में उमड़ी छात्रों की भीड़ का हवाला देते हुए पार्टी ने इसे जमीनी स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनाने की रणनीति तैयार की है।

हर घर तक पहुंचेगी शिक्षा और रोजगार की आवाज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि यह अभियान सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी कार्यकर्ता अब राज्यभर में छात्रों, युवाओं और अभिभावकों के बीच पहुंचेंगे।

उनका कहना था कि शिक्षा, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सवाल आज हर परिवार की मुख्य चिंता बन चुके हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह दल घर-घर जाकर इन चिंताओं को सुनेगा और एक व्यवस्थित रिपोर्ट तैयार कर सरकार के सामने रखेगा। पार्टी का मुख्य उद्देश्य बच्चों की वास्तविक भावनाओं को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा नेताओं द्वारा 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को 'झूठ की गूंज' करार दिए जाने पर पटवारी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसे झूठा करार दे रही है।

पटवारी ने कहा- "क्या सरकार उन छात्रों, अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित अभिभावकों या भर्ती परीक्षाओं और रोजगार के संकट से जूझ रहे युवाओं को झूठा बता रही है?"

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे राजनीतिक बयानों से आगे बढ़कर युवाओं की आवाज सुनें और उनके सवालों के ठोस जवाब दें। कांग्रेस का तर्क है कि यदि बच्चों और अभिभावकों की समस्याएं सरकार को झूठ प्रतीत होती हैं, तो यह सीधे तौर पर आम जनता के प्रति उसकी उदासीनता को दर्शाता है।

केजी से पीजी तक सस्ती शिक्षा की मांग

अभियान के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए पटवारी ने केजी से पीजी तक मुफ्त और सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा का बाजारीकरण हो चुका है, जिससे आम परिवारों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना बेहद कठिन होता जा रहा है।

कांग्रेस ने शिक्षा का अधिकार, शिक्षा की सुरक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा प्रणाली को अपनी प्राथमिक मांगों में शामिल किया है। इस दौरान प्रेसवार्ता में पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष शोभा ओझा और पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिन्होंने इस आंदोलन को राज्यव्यापी बनाने का संकल्प लिया।