मण्डला के कान्हा टाइगर रिजर्व में वन विभाग के हाथियों के लिए छह दिवसीय विशेष 'पुनर्योवन शिविर' की शुरुआत हो गई है। सुपखार इलाके में आयोजित इस शिविर का उद्घाटन क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी ने किया। पिछले 16 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत सालभर गश्त और रेस्क्यू जैसे कठिन कामों में मुस्तैद रहने वाले इन हाथियों को उनके रोजमर्रा के कामों से पूरी तरह छुट्टी दी गई है।

15 से 20 सितंबर तक चलने वाले इस कैंप में हाथियों की सेहत और मानसिक सुकून का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

हाथियों का हेल्थ चेकअप और विशेष डाइट

कान्हा टाइगर रिजर्व में इस समय कुल 16 हाथी हैं, जिनमें 9 नर, 6 मादा और एक नन्हा नवजात शिशु शामिल है। ये सभी हाथी सालभर गश्त करने, वन्यजीवों की निगरानी रखने और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की जिम्मेदारी संभालते हैं। लगातार व्यस्तता और काम के दबाव के बीच इनकी शारीरिक और मानसिक सेहत को बनाए रखने के लिए शिविर में इन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

सुपखार के इस कैंप में हाथियों का डिटेल्ड हेल्थ चेकअप किया जा रहा है। इसके तहत उनके खून, मल और पेशाब के सैंपल लिए जा रहे हैं, शरीर की माप ली जा रही है और जरूरत के मुताबिक उन्हें पौष्टिक आहार परोसा जा रहा है। दिन की शुरुआत शानदार स्नान और उसके बाद शरीर व पैरों की रिलैक्सिंग मालिश के साथ होती है। थकान और तनाव से दूर ये हाथी अब झुंड में खुलकर रह रहे हैं, साथ खा रहे हैं और एक-दूसरे के साथ खेल-कूद का आनंद ले रहे हैं।

महावतों और कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग सत्र

इस शिविर का दायरा सिर्फ हाथियों के आराम तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों को भी अपडेट किया जा रहा है। कैंप के दौरान महावतों और चारा काटने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष ट्रेनिंग सत्र रखे गए हैं।

वरिष्ठ महावत इन सत्रों में हाथियों के बारीक व्यवहार को समझने, उनकी बेहतर ग्रूमिंग करने और इमरजेंसी स्थितियों में उन्हें सुरक्षित तरीके से संभालने के गुर सिखा रहे हैं। पिछले 16 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही यह परंपरा यह दर्शाती है कि कान्हा प्रबंधन अपने वन रक्षकों की सेहत और देखभाल के प्रति कितना गंभीर है।