डीग जिला पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ के निर्देशन में पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली में चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर थाना इलाके में एक तीन मंजिला इमारत पर छापा मारकर 80 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों में 43 महिलाएं भी शामिल हैं, जो बैंक कर्मचारी बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाती थीं।एसपी ने बताया कि कॉल सेंटर से कुल 85 व्यक्तियों को डिटेन किया गया  पूछताछ के बाद कुल 19 युवक युवतियों के परिजनों के साथ वापस भेज दिया गया दो नाबालिगों को रेस्क्यू कर दिया गया है शेष 64 आरोपियों से पूछताछ जारी है कॉल सेंटर से डिटेन किया गए आरोपियों के कब्जे से 88 एंड्राइड मोबाइल भी जप्त किए गए हैं यह पूरा नेटवर्क एक प्राइवेट बैंक के क्रेडिट कार्ड के नाम पर संगठित तरीके से ऑनलाइन ठगी का साम्राज्य चला रहा था।

--बैंक मैनेजर की शिकायत पर शुरू हुई जांच

डीग पुलिस अधीक्षक (SP) शरण गोपीनाथ. ने बताया कि कुछ समय पहले एक निजी बैंक के मैनेजर ने डीग के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि कुछ अज्ञात लोग उनके बैंक का नाम इस्तेमाल कर क्रेडिट कार्ड के नाम पर ग्राहकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी कर रहे हैं। मामला दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान शुरू किया।

--एक गिरफ्तारी से खुला 'ठगी का गढ़'

पुलिस ने सबसे पहले इस गिरोह के एक स्थानीय गुर्गे को गिरफ्तार किया। जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो पुलिस के सामने एक चौंकाने वाला सच आया। आरोपी ने बताया कि इस ठगी का मुख्य केंद्र डीग या राजस्थान नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली है। उत्तम नगर की एक तीन मंजिला इमारत से इस पूरे सिंडिकेट को कॉर्पोरेट स्टाइल में चलाया जा रहा था।
इनपुट पुख्ता होते ही डीग एसपी के निर्देशन में साइबर पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजी गई। दिल्ली पुलिस के सहयोग से जब उत्तम नगर की संदिग्ध इमारत पर छापा मारा गया, तो वहां का नजारा देखकर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। वहां दर्जनों लड़के-लड़कियां कंप्यूटर और हेडफोन लगाकर देश भर के लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी सिम कार्ड और डेटा शीट बरामद की है।एसपी शरण गोपीनाथ ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक ही जगह से पकड़े जाना साबित करता है कि यह एक बेहद संगठित गिरोह है। हिरासत में लिए गए सभी 80 से अधिक लोगों को डीग लाया गया है। पुलिस अब इस जांच में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है, इन्हें बैंक ग्राहकों का डेटा कहां से मिलता था और अब तक यह गिरोह कितने करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य राज्यों और अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं।