पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। हालांकि, भगवंत मान सरकार की कुछ कल्याणकारी योजनाएं विपक्षी दलों की राह में सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं। साल 2022 के चुनाव में 92 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली 'आप' अब इन्हीं योजनाओं को चुनावी हथियार बनाकर दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
मुफ्त बिजली योजना: 90% घरों का शून्य आ रहा बिल
सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और पुराने बकाया बिल माफ करने की गारंटी दी थी। सरकार गठन के बाद से ही इस योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
इस स्कीम के तहत राज्य के करीब 90 फीसदी परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है, जिससे अधिकांश घरों का बिजली बिल शून्य हो गया है। सीधे तौर पर घरेलू बजट पर पड़ने वाले इस असर को पार्टी ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में अपना सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड मान रही है।
मावां धीयां सतकार योजना: महिलाओं को मासिक आर्थिक मदद
साल 2022 के चुनावी वादों को पूरा करते हुए मान सरकार ने इस साल अप्रैल में 'मावां धीयां सतकार योजना' की शुरुआत की। चुनाव से ठीक पहले लागू की गई इस योजना को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपये और एससी वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये की मासिक आर्थिक सहायता सीधे उनके खातों में भेजी जा रही है। इसके जरिए सरकार ने परिवार की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा सीधे तौर पर साध लिया है, जिसका असर महिला मतदाताओं के रुख में साफ देखा जा रहा है।
कैशलेस स्वास्थ्य सेवा और उपचार के आंकड़े
स्वास्थ्य के मोर्चे पर मान सरकार राज्य के लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध करा रही है, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बड़ा आर्थिक संबल मिला है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, 69,12,697 पात्र परिवारों के मुकाबले अब तक 26,18,712 लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है। योजना के तहत अब तक 3 लाख से ज्यादा मरीज मुफ्त उपचार प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में इस योजना से राज्यभर के 880 अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जबकि दर्ज औसत क्लेम राशि 14,628.04 रुपये है। इन बुनियादी सुविधाओं के दम पर 'आप' एक बार फिर चुनावी वैतरणी पार करने की रणनीति पर काम कर रही है।
