Monday, 26 October 2026
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पंजाब में बीजेपी-अकाली दल गठबंधन की सुगबुगाहट: 35-45 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी, जल्द हो सकता है ऐलान

संक्षेप में

पंजाब में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच आगामी विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ने पर सहमति बनती दिख रही है। सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है, जिसके तहत बीजेपी 35 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है और गठबंधन में अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में रहेगा।

मुख्य बातें

  • बीजेपी राज्य की 117 में से 35-45 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है
  • 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 18.56 प्रतिशत और अकाली दल को 13.42 प्रतिशत वोट मिले थे
  • दोनों दलों का पुराना गठबंधन 1996 से 2020 तक कायम रहा था
  • गठबंधन जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर अकाली दल का मजबूत दावा रहेगा
राज्य समाचार
पंजाब में बीजेपी-अकाली दल गठबंधन की सुगबुगाहट: 35-45 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी, जल्द हो सकता है ऐलान

पंजाब की सियासत में एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच चुनावी गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों दलों के बीच साथ मिलकर मैदान में उतरने पर सहमति लगभग बन चुकी है और सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है। राजनीतिक गलियारों में इस समझौते का औपचारिक ऐलान जल्द होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

नियोजित फॉर्मूले के तहत बीजेपी राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 35 से 45 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। बाकी बची सीटों पर अकाली दल और अन्य छोटे सहयोगी दल चुनाव लड़ेंगे। दोनों दलों के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पिछले चुनावों में अलग-अलग रहकर चुनाव लड़ने से दोनों को ही नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके बाद अब एक बार फिर पुरानी सियासी धुरी पर लौटने की कवायद शुरू हुई है।

सीटों का गणित और 2024 के आंकड़े

गठबंधन की चर्चाओं के बीच दोनों पार्टियों के चुनावी प्रदर्शन का डेटा अहम माना जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी को पंजाब में 18.56 प्रतिशत वोट यानी करीब 25 लाख मत मिले थे। वहीं, अकाली दल के खाते में 13.42 प्रतिशत यानी लगभग 18 लाख वोट आए थे।

पार्टी के अंदरूनी आंकलन के मुताबिक, यदि दोनों दलों के वोट प्रतिशत को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 43 लाख के पार पहुंच जाता है। इसके अलावा, 2022 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों के संयुक्त वोट करीब 41 लाख के आसपास रहे थे। बीजेपी का आंतरिक सर्वे बताता है कि अगर दोनों दल मिलकर उतरते हैं, तो त्रिकोणीय मुकाबले में वे सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

सीट शेयरिंग पर पेंच और पुरानी रणनीतियां

पारंपरिक तौर पर बीजेपी पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन में 23 सीटों पर ही चुनाव लड़ती आई है। हालांकि, 2024 के लोकसभा प्रदर्शन के आधार पर बीजेपी इस बार अधिक सीटों पर दावा ठोक रही है। पिछले चुनाव में बीजेपी 45 विधानसभा क्षेत्रों में अकाली दल से आगे रही थी।

दूसरी ओर, अकाली दल का रुख साफ है कि बीजेपी को उन्हीं सीटों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए जहां उसकी ज़मीनी पकड़ मजबूत है। इसके अलावा, पारंपरिक रूप से बीजेपी शहरी क्षेत्रों और अकाली दल ग्रामीण सीटों पर चुनाव लड़ता रहा है, लेकिन इस बार अकाली दल सेमी-अर्बन (अर्द्ध-शहरी) सीटों पर भी अपनी दावेदारी पेश कर रहा है, जहां बीजेपी का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में इन खास सीटों के तालमेल को लेकर अभी भी चर्चा जारी है।

अकाली दल की भूमिका और पुराना इतिहास

राजनीतिक समीकरणों के तहत यह भी तय माना जा रहा है कि गठबंधन में अकाली दल 'बड़े भाई' की भूमिका में रहेगा और चुनाव जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर भी उसका ही मुख्य दावा होगा। इसके साथ ही, अकाली दल उन पुराने नेताओं और बिछड़े धड़ों को पार्टी में वापस लाने की कोशिश में जुटा है जो मतभेदों के चलते अलग हो गए थे।

गौरतलब है कि अकाली दल और बीजेपी का यह पुराना गठबंधन 1996 से 2020 तक कायम रहा था। इस दौरान 1997, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में इस गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन कर सरकार बनाई थी। कृषि कानूनों के मुद्दों पर 2020 में दोनों की राहें जुदा हो गई थीं, लेकिन अब चुनावी जमीन की हकीकत को देखते हुए दोनों दल पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक बार फिर साथ आने की तैयारी में हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पंजाब में बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन तय हो गया है?

हाँ, दोनों दलों के बीच साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति लगभग बन चुकी है और सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा अंतिम दौर में है।

बीजेपी इस बार कितनी सीटों पर चुनाव लड़ सकती है?

संभावित फॉर्मूले के तहत बीजेपी पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 35 से 45 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

क्या गठबंधन में सीएम पद को लेकर कोई स्थिति साफ है?

सूत्रों के अनुसार गठबंधन में अकाली दल 'बड़े भाई' की भूमिका में रहेगा और चुनाव जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर अकाली दल का ही मुख्य दावा होगा।

दोनों दलों का पुराना गठबंधन कब टूटा था?

अकाली दल और बीजेपी का पुराना गठबंधन 1996 से 2020 तक चला था, जो कृषि कानूनों के विरोध में साल 2020 में टूट गया था।