राजस्थान में हर साल 40 से 45 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं और बढ़ते मामलों के बीच जयपुर इलाज का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार देश में वर्ष 2025 में करीब 15.7 लाख नए कैंसर मरीज सामने आने का अनुमान है, जबकि दुनिया भर में हर साल 2 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। प्रदेश में कैंसर के बढ़ते बोझ को देखते हुए सरकार जिला स्तर तक वास्तविक आंकड़े जुटाने के लिए एकीकृत कैंसर रजिस्ट्री शुरू करने की तैयारी कर रही है, ताकि मरीजों की संख्या और इलाज की जरूरतों का बेहतर आकलन किया जा सके।

विशेषज्ञों के मुताबिक कैंसर से सबसे बड़ी लड़ाई समय पर पहचान है। अधिकांश मरीज बीमारी के तीसरे या चौथे चरण में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज मुश्किल और महंगा हो जाता है। वहीं स्तन, सर्वाइकल, मुंह, फेफड़ों, ब्लड और बड़ी आंत जैसे कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इलाज की सफलता कई गुना बढ़ जाती है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और अन्य विशेषज्ञ केंद्र हर साल हजारों मरीजों के इलाज का सहारा बन रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार तंबाकू का सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, प्रदूषण और बदलती जीवनशैली कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग, समय पर जांच, तंबाकू पर नियंत्रण और जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार सही समय पर जांच और उपचार मिलने पर कैंसर को हराकर सामान्य और स्वस्थ जीवन जीना पूरी तरह संभव है।