राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा अपडेट आ गया है। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने प्रदेश में OBC वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सटीक आंकड़ा जुटाने के लिए शुक्रवार, 10 जुलाई से राज्यव्यापी डिजिटल सर्वे शुरू कर दिया है। यह सर्वे 23 जुलाई तक प्रदेश के सभी जिलों में चलाया जाएगा, जिसमें 51,168 सरकारी प्रगणक घर-घर जाकर ओबीसी परिवारों की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति की जानकारी जुटाएंगे। इसके लिए ‘राजधारा सर्वे मोबाइल ऐप’ का इस्तेमाल किया जायेगा
वही इस सर्वे से मिलने वाले डेटा के आधार पर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण की नई स्थिति तय होगी माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट आगामी सरपंच, पार्षद और जिला परिषद चुनावों के लिए सीटों के आरक्षण निर्धारण में अहम भूमिका निभाएगी। इससे पहले स्थानीय निकाय चुनावों में OBC, SC, ST और महिलाओं के आरक्षण से जुड़े आंकड़ों की कमी के कारण चुनाव प्रक्रिया में देरी हो रही थी।
आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन के मुताबिक डिजिटल सर्वे का उद्देश्य स्थानीय निकायों में ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा नया और प्रमाणिक डेटा तैयार करना है, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार को सिफारिशें भेजी जाएंगी। सर्वे प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डेटा क्वालिटी कंट्रोल की व्यवस्था जारी है।
सर्वे को सफल बनाने के लिए जिला स्तर पर 82 नोडल अधिकारियों, 765 ब्लॉक अधिकारियों और 1428 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सभी जिलों में अतिरिक्त जिला कलेक्टर को समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जिला कलेक्टरों और पंचायती राज विभाग को आपसी तालमेल से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने OBC परिवारों से अपील की है कि वे सर्वे के दौरान सही और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि भविष्य में पंचायत और निकाय चुनाव बिना किसी कानूनी अड़चन के आसानी से कराए जा सकें।
