भाई-बहन के प्रेम और अटूट विश्वास का पर्व रक्षाबंधन हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं में राखी को महज एक धागा नहीं, बल्कि सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि पर्व के बाद राखी को यूं ही फेंकने के बजाय इसके विसर्जन को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं।
राखी कब खोलनी चाहिए?
कलाई पर बंधी राखी को उतारने को लेकर कोई एक निश्चित या सख्त नियम नहीं है। आमतौर पर रक्षाबंधन के करीब 24 घंटे बाद राखी उतारी जा सकती है। हालांकि, देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी-अपनी पारिवारिक परंपराओं के मुताबिक इसका समय तय होता है। कुछ परंपराओं में कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर पुरानी राखी उतारने का विधान है। वहीं, कई लोग सालभर कलाई पर ही राखी बांधे रखते हैं और अगले साल रक्षाबंधन के दिन ही पुरानी राखी हटाकर नई राखी धारण करते हैं।
पुराने रक्षासूत्र का क्या करें?
कलाई से राखी उतारने के बाद उसे कभी भी सड़क, इधर-उधर या कूड़ेदान में नहीं फेंकना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षासूत्र का सम्मानपूर्वक विसर्जन करना ही उचित माना जाता है।
- पुरानी राखी को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित किया जा सकता है।
- इसके अलावा, राखी को किसी पेड़ की शाखा पर भी बांधा जा सकता है। कुछ जगहों पर पेड़ पर राखी बांधते समय उसके साथ एक रुपये का सिक्का भी रखने की परंपरा है।
- श्रद्धा के साथ इस तरह पुराने रक्षासूत्र को विदा करना ही सही तरीका माना गया है।
