Tuesday, 27 October 2026
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रमा एकादशी 2026: कब है व्रत और पारण का सही समय?

संक्षेप में

रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की यह एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11:03 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे समाप्त होगी। व्रत का पारण 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से पहले किया जाएगा।

मुख्य बातें

  • रमा एकादशी व्रत 5 नवंबर 2026 को रखा जाएगा।
  • एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11:03 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे समाप्त होगी।
  • व्रत का पारण 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे तक किया जाएगा।
  • पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और ‘शान्ताकारं भुजंगशयनं’ का पाठ किया जाता है।
धर्म
रमा एकादशी 2026: कब है व्रत और पारण का सही समय?

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत को करने से जाने-अनजाने हुए पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस साल रमा एकादशी की सटीक तिथि, व्रत का दिन और पारण का समय स्पष्ट किया है।

रमा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 4 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 3 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। पंचांग के नियमों और उदया तिथि के आधार पर रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की आराधना कर व्रत का संकल्प ले सकते हैं।

व्रत पारण का समय और नियम

रमा एकादशी का व्रत अगले दिन यानी 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को खोला जाएगा।  पारण के दिन द्वादशी तिथि सुबह 10 बजकर 30 मिनट तक मान्य रहेगी। धार्मिक परंपराओं के अनुसार एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अनिवार्य माना जाता है। हालांकि, व्रत तोड़ने से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार सूर्योदय और पारण के सटीक समय की पुष्टि जरूर कर लें।

भगवान विष्णु की पूजा विधि

रमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा स्थल को शुद्ध करें। इसके बाद भगवान विष्णु को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। पूजा के दौरान विष्णु जी को पीला चंदन और पीले रंग के पुष्प अर्पित किए जाते हैं। घी का दीपक प्रज्वलित कर व्रत का संकल्प लें और भगवान के मूल मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का मन में स्मरण करें।

पूजा के अंतिम चरणों में रमा एकादशी की व्रत कथा का पाठ किया जाता है और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आरती उतारी जाती है। भगवान को भोग लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रसाद में तुलसी दल जरूर शामिल हो। पूजा के अंत में भगवान से भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है।

विष्णु स्तुति और मंत्र पाठ

धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान भगवान विष्णु की स्तुति करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। रमा एकादशी के दिन श्रद्धालु ‘शान्ताकारं भुजंगशयनं’ मंत्र का पाठ कर सकते हैं। यह प्रसिद्ध स्तुति इस प्रकार है:

शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रमा एकादशी 2026 कब है?

रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी।

रमा एकादशी 2026 की तिथि कब से कब तक है?

कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 4 नवंबर 2026 को सुबह 11:03 बजे शुरू होगी और 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे समाप्त होगी।

रमा एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा?

रमा एकादशी व्रत का पारण 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे से पहले किया जाएगा, क्योंकि इस समय तक द्वादशी तिथि रहेगी।

रमा एकादशी पर किस मंत्र का जाप करना चाहिए?

रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के मूल मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करना चाहिए और ‘शान्ताकारं भुजंगशयनं’ स्तुति का पाठ करना चाहिए।