शेयर बाजार में कमाई करने और तेजी से बढ़ रही कंपनियों में शुरुआती स्तर पर हिस्सेदारी पाने के लिए इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) निवेशकों के बीच सबसे पसंदीदा जरिया माना जाता है। जब कोई प्राइवेट कंपनी बिजनेस का विस्तार करने, नया प्लांट लगाने या पुराना कर्ज चुकाने के लिए पहली बार आम जनता को शेयर बेचकर स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होती है, तो उसे आईपीओ कहा जाता है।

हालांकि, बिना सोचे-समझे केवल अफवाहों या हाइप के दम पर पैसा लगाना नुकसान का सौदा साबित हो सकता है। नए निवेशकों के लिए आईपीओ में बोली लगाने की पूरी प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है।

ऐसे करें आईपीओ में निवेश की प्रक्रिया पूरी

आईपीओ में शेयर हासिल करने और बेचने के लिए सबसे पहले आपके पास एक चालू डीमैट खाता होना जरूरी है। आप सेबी रजिस्टर्ड किसी भी ब्रोकर के साथ ऑनलाइन डीमैट अकाउंट ओपन कर सकते हैं। इसके बाद पेमेंट के लिए बैंक खाते को Google PhonePe, Google Pay या BHIM जैसे किसी भी यूपीआई ऐप से जोड़ना होगा या नेट बैंकिंग का विकल्प चुनना होगा।

खाता चालू होने के बाद अपने ट्रेडिंग ऐप के आईपीओ सेक्शन में जाएं और चालू ऑफर्स में से अपनी पसंद का शेयर चुनें। आपको लॉट साइज के अनुसार बोली लगानी होगी। हमेशा Cut Off Price विकल्प को चुनना बेहतर माना जाता है, जिससे अलॉटमेंट मिलने के चांस बढ़ जाते हैं। आवेदन जमा करने के बाद यूपीआई ऐप पर एक मैंडेट रिक्वेस्ट आती है, जिसे अप्रूव करते ही राशि आपके बैंक खाते में ही ब्लॉक हो जाती है। शेयर अलॉट होने पर ही पैसा कटता है, जबकि अलॉटमेंट न मिलने पर राशि अपने आप अनब्लॉक हो जाती है।

पैसा लगाने से पहले परखें ये 4 पैमाने

किसी भी अपकमिंग आईपीओ में नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए निवेशकों को कुछ प्रमुख पैमानों पर कंपनी की वित्तीय सेहत को जांचना चाहिए।

  • रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP): यह कंपनी का आधिकारिक दस्तावेज होता है, जो सेबी की वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है। इसमें यह देखना जरूरी है कि कंपनी आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल कहां करेगी। यदि पैसा बिजनेस विस्तार या एसेट्स बनाने में लग रहा है, तो इसे पॉजिटिव माना जाता है। इसके विपरीत, अगर पुराने प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल रहे हैं, तो सतर्क हो जाना चाहिए। साथ ही, कंपनी का पिछले 3 से 5 सालों का रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट लगातार बढ़ता होना चाहिए।
  • ग्रे मार्केट प्रीमियम और सब्सक्रिप्शन: लिस्टिंग से पहले अनऑफिशियल मार्केट में शेयर जिस प्रीमियम पर ट्रेड करता है, उसे जीएमपी कहते हैं। अगर जीएमपी लगातार 20% से 30% के ऊपर बना रहता है, तो मजबूत लिस्टिंग की उम्मीद बढ़ जाती है। इसके अलावा, आईपीओ के आखिरी दिन तक यह जरूर देखें कि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने कितना सब्सक्रिप्शन लिया है।
  • वैल्यूएशंस की तुलना: यह जांच लें कि कंपनी का पी/ई यानी प्राइस टू अर्निंग्स रेशियो उसकी टक्कर की दूसरी लिस्टेड कंपटीटर कंपनियों के मुकाबले बहुत ज्यादा तो नहीं है। अत्यधिक ओवरवैल्यूड आईपीओ लिस्टिंग के दिन घाटा दे सकते हैं।
  • बिजनेस मॉडल: हमेशा ऐसी कंपनियों में निवेश करें जिनका बिजनेस मॉडल आसानी से समझ आता हो। भविष्य में जिस सेक्टर की मांग बढ़ने वाली है, जैसे ईवी, ग्रीन एनर्जी और टेक, उनमें लॉन्ग टर्म में जोखिम कम होता है।

नुकसान से बचने के जरूरी थंब रूल्स

विशेषज्ञों के मुताबिक, घाटे वाली कंपनियों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए जो केवल भविष्य के दावों पर टिकी हैं। रिटेल निवेशकों के लिए ऐसी कंपनियों में पूंजी डूबने का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा, आईपीओ खुलने के पहले या दूसरे दिन हड़बड़ी में दांव लगाने के बजाय संस्थागत निवेशकों का रुख देखना चाहिए और तीसरे दिन दोपहर तक अंतिम फैसला लेना चाहिए। अपनी पूरी पूंजी किसी एक ही आईपीओ में लगाने के बजाय अलग-अलग सेक्टर्स की कंपनियों में पोर्टफोलियो डायवर्सीफाई करना हमेशा सुरक्षित रहता है।