रक्षाबंधन और त्योहारी सीजन से ठीक पहले रसोई का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। चीनी, प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। बाजार में मांग बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार ने चीनी और प्याज के मोर्चे पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जमाखोरी रोकने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, वहीं आपूर्ति सुधारने के लिए आयात को भी मंजूरी दी गई है।
चीनी के दामों में तेज उछाल, 1 सितंबर से हलवाई और बेकरी पर शिकंजा
बाजार में पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में करीब 17 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है। वर्तमान में खुदरा भाव बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि पिछले एक सप्ताह में ही इसमें करीब 7 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। कीमतों में इस अचानक उछाल की एक बड़ी वजह जमाखोरी की आशंका को माना जा रहा है।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने स्टॉक सीमा तय कर दी है। इसके अलावा, 1 सितंबर से हलवाई और बेकरी संचालकों के लिए नया नियम प्रभावी होगा, जिसके तहत वे 15 दिन से ज्यादा का चीनी स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे। बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति भी दी है। साथ ही, घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों को इस बार 15 अक्टूबर से ही पेराई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्याज और दालों की कीमतों में भी तेजी
प्याज के खुदरा भाव में भी पिछले कुछ हफ्तों से लगातार तेजी बनी हुई है। 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव 40.79 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि एक सप्ताह पहले यह 36.56 रुपये और एक महीने पहले 34.87 रुपये प्रति किलो था। कीमतों में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह खरीफ सीजन के नए प्याज की आवक में देरी को बताया जा रहा है।
रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख दालों—अरहर, मूंग, उड़द और चना—के दाम में भी पिछले एक महीने के दौरान 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक की मामूली बढ़त हुई है। दालों की कीमतों में इस उतार-चढ़ाव के पीछे कमजोर मानसून और दलहन की बुवाई से जुड़ी परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। जानकारों का मानना है कि यदि मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में दालों के बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है।
त्योहारी मांग और परिवहन बदलाव का असर
त्योहारी सीजन के नजदीक आते ही खाद्य पदार्थों की मांग में तेजी आ जाती है। ऐसे में यदि फसल की आवक या सप्लाई चेन पर मौसम का असर पड़ता है, तो कीमतों में उछाल आना स्वाभाविक हो जाता है। चीनी, प्याज और दालों के अलावा खाद्य तेलों के दाम भी अलग-अलग कारणों से प्रभावित हुए हैं।
दूसरी ओर, परिवहन और माल ढुलाई के स्तर पर भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिसके तहत दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में डीजल और सीएनजी से चलने वाली कुछ लोडिंग गाड़ियों के संचालन को लेकर नए प्रतिबंध और नियम लागू किए गए हैं। इन प्रशासनिक और आपूर्ति से जुड़े कदमों के बीच बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं।
