सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन पहुंची पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती ने बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई। भगवान महाकाल के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद उमा भारती ने जहां उज्जैन की मौजूदा व्यवस्थाओं पर संतोष जताया, वहीं सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के लिए श्रद्धालुओं की संभावित संख्या, मंदिर की क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का पहले से आकलन होना जरूरी है। उमा भारती ने साफ कहा कि सिंहस्थ की विशालता को देखते हुए अभी से ठोस प्लानिंग और व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जानी चाहिए।

कई मुद्दों पर रखी बात

महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उमा भारती ने मीडिया से बातचीत की और सिंहस्थ 2028 सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उज्जैन में इस समय व्यवस्थाएं पहले की तुलना में बेहतर दिखाई दे रही हैं, लेकिन सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन की चुनौती अलग है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की क्षमताओं के साथ-साथ मंदिर की क्षमता और सुरक्षा इंतजामों का भी पहले से आकलन किया जाना जरूरी है।

तैयारियों को लेकर नहीं संतुष्ट
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर उमा भारती ने चिंता जताते हुए कहा कि अभी तक जो तैयारियां दिखाई दे रही हैं, वे उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने आयोजन की विशालता को देखते हुए समय रहते सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत बताई। उमा भारती के इस बयान के बाद सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है।

सीएम की तारीफ की
वहीं किसानों की जमीन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करने के फैसले की भी उमा भारती ने सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन के मामले में उचित और स्थायी मुआवजा दिया जाना चाहिए और समाधान किसानों की सहमति से निकाला जाना चाहिए। उनका कहना है कि विकास और किसानों के हित के बीच संतुलन बनाते हुए कोई स्थायी रास्ता निकाला जाना जरूरी है।

भाषा की निंदा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर भी उमा भारती ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ऐसी भाषा की निंदा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक गरिमा का परिचय दिया और युवाओं की भावनाओं का सम्मान किया। साथ ही उन्होंने व्यवस्था में मौजूद गंदगी को दूर करने की जरूरत बताते हुए कहा कि केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

शराबबंदी के मुद्दे पर बोली 
शराबबंदी के मुद्दे पर भी उमा भारती ने समाज और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शराब से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि सरपंच से लेकर सांसद और विधायक तक सभी को अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता और सख्ती के लिए प्रयास करना चाहिए। समाज के स्तर पर भी शराब के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।


बाबा महाकाल के दरबार में पूजा-अर्चना के बाद उमा भारती ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से लेकर किसानों, शराबबंदी और प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी। खास तौर पर सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर उनकी चिंता ने बड़े आयोजन से पहले व्यवस्थाओं की समीक्षा और ठोस प्लानिंग की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।