खंडवा में किसानों का अनोखा प्रदर्शन, कलेक्टर ज्ञापन लेने नहीं आए तो कुत्ते के गले में बांधा पत्र, जानें मांगें खंडवा में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय में अनोखा विरोध प्रदर्शन किया. लंबे समय तक कलेक्टर के ना आने पर किसानों ने सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर की उपस्थिति में अपना ज्ञापन एक कुत्ते को सौंप दिया. किसानों ने प्रशासन पर अनदेखी और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाये.

किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे
मध्य प्रदेश के खंडवा में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे. किसान अपनी विभिन्न स्थानीय और नीतिगत समस्याओं को लेकर सीधे कलेक्टर से मिलना चाहते थे. वे अपना ज्ञापन भी केवल कलेक्टर को ही सौपना चाहते थे. 
परिसर में लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी जब कलेक्टर मौके पर नही पहुंचे, तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. इसके बाद किसानों ने किसी भी अन्य प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देने से साफ इनकार कर दिया.

सिटी मजिस्ट्रेट के सामने अनोखा विरोध
स्थिति को बिगड़ता देख सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर खुद किसानों के बीच पहुंचे. उन्होंने किसानों से बात की और ज्ञापन लेने का प्रयास किया. इसके बावजूद किसान सीधे कलेक्टर को ही बुलाने की मांग पर कायम रहे. जब बात नहीं बनी तो किसानों ने विरोध दर्ज कराने का एक अनोखा तरीका निकाला. उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर की मौजूदगी में ही अपना ज्ञापन परिसर में मौजूद एक कुत्ते को सौंप दिया. इस अनोखे प्रदर्शन के माध्यम से किसानों ने प्रशासनिक रवैये और अपनी अनदेखी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया.

दोहरा मापदंड अपना रही सरकार

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ और किसान नेताओं ने अपनी मुख्य समस्याओं को सामने रखा. किसानों का कहना है कि गांवों में पानी भर गया है और लगभग 50 से 60 परिवारों के लोग नाव से यात्रा करने को मजबूर हैं. ग्रामीण लंबे समय से पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक पुल का निर्माण नहीं हुआ है. पानी का स्तर अत्यधिक बढ़ने पर ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगा.इसके साथ ही इंदिरा सागर बांध के प्रभावित और विस्थापित लोगों के साथ न्याय की मांग की गई. किसानों का कहना है कि खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी जिलों में इंदिरा सागर प्रभावितों को सरदार सरोवर बांध के समान मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. राज्य सरकार एक ही प्रदेश में मुआवजा वितरण में दोहरा मापदंड अपना रही है.


राजमार्ग अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजे की मांगकिसानों ने राजमार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि सरकार के आदेश के अनुसार राजमार्ग अधिग्रहण में चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए. इसके विपरीत कलेक्ट्रेट और स्थानीय अधिकारी किसानों को केवल दो गुना (डबल) मुआवजा दे रहे हैं. किसानों का आरोप है कि कलेक्ट्रेट के अधिकारी सरकार के अपने नियमों और आदेशों को अनदेखा कर रहे है. समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें बार-बार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही. महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो इस आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा.