अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ती बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक संशोधित विधेयक पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान जैसे देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस विधेयक का उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली आय को कम करना और उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करना बताया गया है। प्रस्तावित बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, इसे कानून बनने से पहले अमेरिकी सीनेट, प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

बिल में रूस के ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों, सरकारी अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े और रक्षा उद्योग पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव शामिल है। पहले इस विधेयक में 500% टैरिफ लगाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। वहीं कुछ यूरोपीय देशों को राहत देने का भी प्रावधान रखा गया है, क्योंकि उन्होंने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

अगर यह विधेयक लागू होता है तो भारत पर इसका बड़ा आर्थिक असर पड़ने की संभावना है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और भारतीय वस्त्र, दवा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद समेत कई सेक्टरों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। 100% टैरिफ लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिका में काफी महंगे हो सकते है जिससे निर्यात पर असर पड़ सकता है और लाखों रोजगार प्रभावित होने की आशंका जताई गयी है। दूसरी ओर, भारत फिलहाल रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। जून 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जो कुल आयात का 52.4% था। ऐसे में यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है तो भारत के सामने सस्ती ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी बाजार में निर्यात, दोनों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।