शाजापुर जिले के गुलाना तहसील क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर हैं। मुरादपुर पथरिया गांव में नाला पार करते समय एक युवक तेज बहाव की चपेट में आकर बहने लगा। युवक की चीख सुनकर ग्रामीणों ने नाले में छलांग लगाई और घेराबंदी कर उसकी जान बचा ली। गनीमत रही कि समय रहते ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।दरअसल, सोमवार को मुरादपुर पथरिया निवासी लाखन सिंह गुर्जर का बेटा हरिओम नाले के दूसरी तरफ जंगल में बने मकान से दूध लेकर वापस गांव लौट रहा था। इसी दौरान नाले में पानी का बहाव अचानक तेज हो गया। हरिओम का संतुलन बिगड़ा और वह पानी के तेज बहाव में बहने लगा। घबराए हरिओम ने मदद के लिए आवाज लगाई। आवाज सुनते ही आसपास मौजूद ग्रामीणों ने बिना देर किए नाले में छलांग लगा दी और घेराबंदी कर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।ग्रामीणों के मुताबिक हरिओम को तैरना भी नहीं आता है। ऐसे में यदि ग्रामीण समय पर मदद के लिए नहीं पहुंचते तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों की चिंता बढ़ गई। युवक को सुरक्षित देखकर परिवार ने राहत की सांस ली।“बारिश में नाला हर साल उफान पर आता है। कई बार मवेशी भी बह चुके हैं। पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है।”मुरादपुर पथरिया गांव की सबसे बड़ी समस्या यह है कि गांव नाले के एक किनारे बसा है, जबकि ग्रामीणों की अधिकांश खेती की जमीन दूसरी तरफ है। करीब 200 परिवारों के इस गांव की 80 प्रतिशत से अधिक जमीन नाले के पार बताई जा रही है। मवेशियों के लिए चारा और रोजमर्रा के काम के लिए ग्रामीणों को बारिश में भी नाला पार करना पड़ता है।घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश भी सामने आया। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नाले पर पुल बनाने के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद यह समस्या भुला दी जाती है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से नाले पर जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बारिश के दिनों में किसी की जान खतरे में न पड़े।फिलहाल ग्रामीणों की तत्परता से युवक की जान बच गई, लेकिन यह घटना एक बार फिर गांव में पुल की जरूरत को उजागर करती है। बारिश के मौसम में नाला उफान पर आने के बाद यहां के ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।