मंदसौर में अफीम उत्पादक किसानों की समस्याओं को लेकर प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर हलचल तेज हो गई है। किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने केंद्र सरकार से आगामी वर्ष की अफीम नीति जल्द घोषित करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में पट्टे बहाल करने से लेकर समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी तक कई प्रमुख मांगें उठाई गई हैं।
समय पर नीति न आने से खेती की तैयारी में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए यह ज्ञापन दिया गया है। किसान नेताओं का कहना है कि नीति में देरी से किसानों को बुवाई और अन्य कृषि कार्यों का खाका तैयार करने में कठिनाई होती है, जिससे समय रहते सही फैसले लेना मुश्किल हो जाता है।
10 आरी के पट्टे और पारंपरिक चिरा पद्धति बहाल करने की मांग
ज्ञापन में मुख्य रूप से मांग की गई है कि 10 आरी के चिरा वाले अफीम खेती के पट्टे पूर्ववत बहाल किए जाएं। इसके अलावा, वर्ष 1997-98 में काटे गए पट्टों को भी फिर से शुरू करने और किसानों को पारंपरिक चिरा पद्धति से खेती करने की अनुमति देने की पुरजोर मांग उठाई गई है।
किसानों की ओर से यह भी कहा गया है कि अफीम का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए। साथ ही, डोडा चूरा से जुड़े प्रावधानों में नरमी बरतने की मांग की गई है, ताकि किसानों को अनावश्यक कानूनी उलझनों से राहत मिल सके।
प्राकृतिक आपदाओं पर फसल बीमा और नीतिगत सुधार का आग्रह
फसल सुरक्षा के मोर्चे पर, ज्ञापन में मांग की गई है कि अतिवृष्टि, ओलावृष्टि या किसी भी प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान पहुंचने की स्थिति में किसानों को फसल बीमा योजना का पूरा लाभ मिलना चाहिए।
श्यामलाल जोकचंद और मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के अफीम उत्पादक किसानों ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से इन मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने का आग्रह किया है। किसानों का तर्क है कि यदि समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले सीजन में किसानों को आर्थिक मोर्चे पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
