राजस्थान की सियासत में त्योहारी सीजन के बीच उस समय सियासी पारा चढ़ गया, जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जोधपुर में एक पदयात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखे हमले किए। सीएम के इस बयान के बाद राज्य में सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है।
जोधपुर में आयोजित जनसभा और मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली गहलोत सरकार पर भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामलों को लेकर सीधे निशाने साधे। इसके जवाब में पूर्व सीएम ने इसे निराधार बताते हुए अल्टीमेटम जारी कर दिया है।
जोधपुर पदयात्रा में सीएम के निशाने पर पिछली सरकार
जोधपुर की पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंच से कड़े शब्दों में कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने खुली चेतावनी देते हुए कहा, 'अरे गहलोत साहब, पूरी तरह से सुन लीजिए। अगर बायां हाथ गलती करेगा, भ्रष्टाचार करेगा तो बाएं हाथ को काट दिया जाएगा। अगर दायां हाथ भ्रष्टाचार करेगा तो दायां हाथ काट दिया जाएगा। यह ब्रजवासी है, किसान का बेटा है... भ्रष्टाचार की पूरी फेहरिस्त बताऊंगा तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। मैं किसी को छोड़ता नहीं, ब्याज सहित चुकाता हूं।'
इस दौरान सीएम ने मुख्य रूप से तीन गंभीर आरोप सामने रखे। उनका दावा था कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पेपर लीक गिरोह के तार सीधे पूर्व सीएमओ से जुड़े थे, जिसमें ओएसडी शशिकांत और पीएसओ राजकुमार यादव के नाम सामने आए थे। इसके अलावा, उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की नियुक्तियों में पैसों के लेन-देन और पुराने खाद-बीज कारोबार के दौरान किसानों को नकली माल बेचने के आरोप भी लगाए।
अशोक गहलोत का पलटवार: 24 घंटे का अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री के इन बयानों के कुछ ही देर बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कड़ा रुख अपनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। गहलोत ने सीएम के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह कपोल-कल्पित और झूठा करार दिया।
पूर्व सीएम ने बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अपराधबोध और बौखलाहट में भाषा की मर्यादा लांघ रहे हैं और जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। गहलोत ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा- अशोक गहलोत ने मांग की कि मुख्यमंत्री अपने बयानों के समर्थन में विस्तृत दस्तावेज और तथ्य प्रदेश की जनता के सामने रखें या फिर 24 घंटे के भीतर अपने इन बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
